नई दिल्ली, 30 सितंबर।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वर्ष 2026 को भारतीय नौसेना के लिए ऐतिहासिक वर्ष बताया है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष नौसेना में 18 युद्धपोतों को शामिल या कमीशन किए जाने की योजना है।
नई दिल्ली में भारतीय नौसेना के द्विवार्षिक कमांडर सम्मेलन के दूसरे संस्करण को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि ये उपलब्धियां देश के घरेलू नौसैनिक पोत निर्माण तंत्र की बढ़ती परिपक्वता को दर्शाती हैं। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में नौसेना के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का युद्धपोत निर्माण तंत्र अब वैश्विक मानकों पर खरा उतर रहा है।
रक्षा मंत्री के अनुसार हाल में नौसेना में शामिल किए गए युद्धपोतों में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है। उन्होंने समुद्री निगरानी व्यवस्था को बड़े स्तर पर उन्नत करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रणालियां महत्वपूर्ण हैं, लेकिन समुद्री यातायात की बढ़ती मात्रा और जटिलता को देखते हुए विश्लेषण की क्षमताओं को भी बेहतर करना जरूरी है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नौसेना के आधुनिकीकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय नौसेना विकसित भारत 2047 की परिकल्पना में रणनीतिक आधार के रूप में काम करती है। उनके अनुसार नौसेना आर्थिक सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और सामरिक शक्ति प्रदर्शन को मजबूत करती है।
रक्षा मंत्री ने बदलती चुनौतियों के बीच उच्च स्तर की युद्धक तैयारी बनाए रखने और क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए भारतीय नौसेना की सराहना की। उन्होंने कहा कि रणनीतिक गहराई और क्षेत्रीय सामरिक शक्ति को बनाए रखने में नौसेना की भूमिका महत्वपूर्ण है।
राजनाथ सिंह ने नौसेना से अपनी गति लगातार बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने इसे भविष्य के लिए तैयार, युद्धक रूप से सक्षम और वैश्विक स्तर पर सम्मानित सैन्य बल के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।














