नैनीताल, 30 सितंबर।
उत्तराखंड उच्च न्यायालय में नैनीताल के ज्योलिकोट और आसपास के क्षेत्रों में दूषित पेयजल के कारण बीमारी फैलने के मामले पर मंगलवार को सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी तथा जल संस्थान और जल निगम के अधिकारी मौजूद रहे।
अदालत ने संक्रमण के मूल जल स्रोतों की जानकारी मांगी है। कोर्ट ने अगली सुनवाई तक दूषित पानी के स्रोतों की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
सुनवाई में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट भी रखी गई। रिपोर्ट के अनुसार वीरभट्टी, बेलुआखान और सरिताताल समेत 10 स्थानों से लिए गए पेयजल नमूनों की जांच में घातक बैक्टीरिया पाए गए।
खुर्पाताल क्षेत्र के लोगों ने भी सरिता ताल के पास सीवर लाइन चोक होने की शिकायत की। उनका कहना है कि इससे पेयजल स्रोतों में गंदगी पहुंचने और बीमारी फैलने की आशंका है।
अदालत ने जल संस्थान और जल निगम के अधिकारियों से ग्रामीणों द्वारा करीब एक महीने पहले बदबूदार पानी की शिकायत किए जाने के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं करने पर नाराजगी जताई। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि टैंकरों से दिए जा रहे पानी में अत्यधिक मात्रा में क्लोरीन मिलाया जा रहा है, जिसका प्रभावित लोगों पर विपरीत असर पड़ रहा है।
मामले को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को पूरे प्रकरण की सीधे निगरानी करने का निर्देश दिया है। साथ ही उन्हें व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने को कहा गया है।
अदालत ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रभावित क्षेत्रों से तत्काल नए नमूने लेने और पूरे नैनीताल क्षेत्र में पेयजल की जांच कराने के आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग की मुख्य चिकित्सा अधिकारी को प्रभावित परिवारों की स्थिति को लेकर अलग से शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश भी दिए गए।
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को तय की है। कोर्ट ने कहा है कि यदि अगली सुनवाई तक सरकार बीमारी फैलने के मुख्य कारणों पर ठोस जवाब नहीं देती है, तो मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया जा सकता है।













