रीवा, 30 सितंबर।
रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में नियोनेटोलॉजी विभाग शुरू होने के साथ विंध्य क्षेत्र के करीब सात वर्ष लंबे इंतजार का अंत हो गया है। विशेषज्ञ चिकित्सक की पदस्थापना के बाद अब गंभीर बीमारियों के साथ जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में उपचार मिल सकेगा। इससे गंभीर नवजात मामलों में बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होने के साथ शिशु मृत्यु दर कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
श्याम शाह मेडिकल कॉलेज से संबद्ध सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की शुरुआत 2019 में गंभीर और जटिल बीमारियों के उपचार के लिए की गई थी। हालांकि, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता नहीं होने के कारण प्रस्तावित सभी विभाग एक साथ शुरू नहीं हो सके। नियोनेटोलॉजी विभाग भी लंबे समय से विशेषज्ञ की पदस्थापना का इंतजार कर रहा था। अब डॉ. निरुपा चंदोरकर को नियोनेटोलॉजिस्ट के रूप में असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त किया गया है।
संजय गांधी अस्पताल में रोज बड़ी संख्या में बच्चों का जन्म होता है। इनमें कुछ नवजात जन्म के समय ही गंभीर बीमारी, संक्रमण या सांस संबंधी समस्या से जूझ रहे होते हैं। समय पर विशेषज्ञ उपचार नहीं मिलने से ऐसे बच्चों की जान बचाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। अब गंभीर स्थिति वाले नवजातों को नियोनेटोलॉजिस्ट की देखरेख में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में उपचार मिल सकेगा। समय से पहले जन्मे बच्चों और जन्मजात गंभीर बीमारियों से प्रभावित नवजातों को भी इसका लाभ मिलेगा।
इन नवजातों को मिलेगी विशेष चिकित्सा सुविधा
नियोनेटोलॉजी शिशु चिकित्सा की विशेष शाखा है, जिसमें जन्म से 28 दिन तक के नवजातों की देखभाल और उपचार किया जाता है। 37 सप्ताह से पहले जन्म लेने वाले बच्चों को विशेष निगरानी की आवश्यकता होती है। इसके अलावा गंभीर संक्रमण, फेफड़ों के पूर्ण विकसित न होने से सांस लेने में परेशानी और जन्मजात विकृतियों वाले नवजातों का भी उपचार इस विभाग में किया जाता है। हृदय, फेफड़ों या अन्य अंगों के पूरी तरह विकसित नहीं होने की स्थिति में भी विशेषज्ञ उपचार जरूरी होता है।
नियोनेटोलॉजी विभाग शुरू होने से विंध्य क्षेत्र के गंभीर नवजात मामलों में उपचार के लिए दूसरे बड़े शहरों पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है। 2019 में अस्पताल शुरू होने के बाद से इस विभाग को शुरू करने की योजना थी, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक की उपलब्धता नहीं होने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब विशेषज्ञ की नियुक्ति के साथ यह सुविधा शुरू हो गई है।














