भोपाल, 30 सितंबर।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक हेमंत खंडेलवाल ने विपणन वर्ष 2027-28 के लिए सभी रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने की दिशा में निर्णय लिया है। उनके अनुसार किसान कल्याण सरकार की प्राथमिकता है और उत्पादन लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत लाभ के अनुरूप न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने का संकल्प पूरा किया गया है।
खंडेलवाल ने बताया कि कुसुम के न्यूनतम समर्थन मूल्य में सबसे अधिक 675 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। रेपसीड एवं सरसों में 413 रुपये, मसूर में 390 रुपये, जौ में 136 रुपये, चना में 83 रुपये और गेहूं में 25 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। नई दरों के अनुसार गेहूं 2610 रुपये, जौ 2286 रुपये, चना 5958 रुपये, मसूर 7390 रुपये, रेपसीड एवं सरसों 6613 रुपये तथा कुसुम 7215 रुपये प्रति क्विंटल होगी।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2027-28 के लिए उत्पादन लागत पर गेहूं में 106 प्रतिशत, रेपसीड एवं सरसों में 96 प्रतिशत, मसूर में 92 प्रतिशत, चना में 59 प्रतिशत, जौ में 58 प्रतिशत और कुसुम में 50 प्रतिशत का अपेक्षित लाभ रखा गया है। उत्पादन लागत में मानव श्रम, मशीनरी, भूमि किराया, बीज, उर्वरक, सिंचाई, कृषि उपकरण, कार्यशील पूंजी पर ब्याज, डीजल-बिजली और पारिवारिक श्रम सहित विभिन्न खर्चों को शामिल किया जाता है।
खंडेलवाल के अनुसार वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच गेहूं की खरीद 3715 लाख मीट्रिक टन रही, जो वर्ष 2004-05 से 2013-14 के दौरान 2254 लाख मीट्रिक टन थी। छह प्रमुख रबी फसलों की खरीद भी 3921 लाख मीट्रिक टन तक पहुंची, जो पूर्व अवधि में 2302 लाख मीट्रिक टन थी। गेहूं उत्पादक किसानों को इस अवधि में 7.31 लाख करोड़ रुपये का न्यूनतम समर्थन मूल्य भुगतान हुआ, जबकि पूर्व अवधि में यह 2.56 लाख करोड़ रुपये था। छह प्रमुख रबी फसलों के लिए भुगतान 8.36 लाख करोड़ रुपये रहा।
उन्होंने कहा कि दलहन और तिलहन को प्रोत्साहन देने से फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा। उनके अनुसार वर्ष 2014-26 के दौरान सभी 22 अधिदेशित न्यूनतम समर्थन मूल्य वाली फसलों की कुल खरीद 12,819 लाख मीट्रिक टन रही, जबकि वर्ष 2004-14 में यह 6,987 लाख मीट्रिक टन थी। किसानों को किया गया न्यूनतम समर्थन मूल्य भुगतान भी 7.41 लाख करोड़ से बढ़कर 27.80 लाख करोड़ रुपये हुआ। खंडेलवाल ने मध्य प्रदेश के किसानों की ओर से प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रिमंडल का आभार व्यक्त किया।














