नई दिल्ली, 30 सितंबर।
स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत उत्तर रेलवे की विभिन्न इकाइयों में बुधवार को ‘कबाड़ से जुगाड़ एवं कबाड़ से कला’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस रचनात्मक पहल में रेलवे कर्मचारियों ने बेकार और अनुपयोगी सामग्री का इस्तेमाल कर आकर्षक कलाकृतियां तैयार कीं। कर्मचारियों ने अपनी प्रतिभा के साथ टीम भावना का भी प्रदर्शन किया।
आलमबाग डीजल शेड और इलेक्ट्रिक लोको शेड, लुधियाना में रेलकर्मियों ने अनुपयोगी सामग्री से दरियाई घोड़ा, घड़ी समेत कई कलाकृतियां बनाईं। इसी तरह डीजल शेड, तुगलकाबाद और इलेक्ट्रिक लोको शेड, गाजियाबाद में कर्मचारियों ने बेकार सामग्री से फूलदान और अन्य आकर्षक कलाकृतियां तैयार कीं।
उत्तर रेलवे के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य कर्मचारियों में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ ‘कचरे से कला’ की अवधारणा को प्रोत्साहित करना है। इस पहल के जरिए यह संदेश दिया गया कि सही सोच, नवाचार और रचनात्मकता से अनुपयोगी समझी जाने वाली वस्तुओं का भी उपयोगी और आकर्षक रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
रेलवे ने बताया कि इन कलाकृतियों के माध्यम से पुन: उपयोग, पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल का संदेश दिया गया। विभिन्न इकाइयों के कर्मचारियों ने अपने कौशल, समर्पण और टीम भावना के साथ इन रचनात्मक कृतियों को तैयार किया।














