भोपाल, 02 अक्टूबर।
मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई की प्रक्रिया जल्द शुरू होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश से मानसून 10 अक्टूबर तक पूरी तरह लौट सकता है। फिलहाल अगले तीन दिन अधिकांश इलाकों में तेज धूप रहने का अनुमान है। 5 अक्टूबर से पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश का दौर शुरू हो सकता है। दिन का तापमान बढ़ेगा, वहीं रात में हल्की ठंडक महसूस होगी।
प्रदेश में मानसून का निर्धारित मौसम 30 सितंबर को समाप्त हो चुका है, लेकिन अभी तक किसी जिले से इसकी आधिकारिक विदाई नहीं हुई है। मानसून की वापसी रेखा इस समय पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान से गुजर रही है। मध्य प्रदेश में यह ग्वालियर-चंबल और उज्जैन संभाग के ऊपर बनी हुई है।
मानसून की वापसी सबसे पहले ग्वालियर-चंबल और उज्जैन संभाग से होने की संभावना है। इसके बाद इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम, सागर, जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग से मानसून लौट सकता है। इसकी शुरुआत शुक्रवार या शनिवार से होने का अनुमान है।
अगले तीन दिन प्रदेश के अधिकतर हिस्सों में मौसम साफ रहने और तेज धूप पड़ने की संभावना है। इसके बाद 5 अक्टूबर को पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में बारिश की गतिविधियां शुरू हो सकती हैं।
अक्टूबर को मौसम में बदलाव वाला महीना माना जाता है। मानसून की वापसी के साथ आसमान साफ होने लगता है और तापमान में बदलाव आता है। दिन में धूप के कारण गर्मी महसूस होती है, वहीं रात में तापमान कम होने से ठंडक बढ़ती है। इस बार भी अक्टूबर में बारिश, गर्मी और ठंड का मिला-जुला असर देखने को मिल सकता है।
अक्टूबर की शुरुआत में ही कई शहरों में रात के तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। महीने के दौरान प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है। हालांकि, कुछ इलाकों में बीच-बीच में हल्की बारिश जारी रह सकती है।
5 अक्टूबर को पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, मैहर, सीधी, सिंगरौली, शहडोल और अनूपपुर में हल्की बारिश होने की संभावना है।
इस मानसून सीजन में प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी 35.8 इंच बारिश दर्ज हुई है। सामान्य बारिश का आंकड़ा 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच है। इस तरह प्रदेश में सामान्य से करीब 1.5 इंच और कुल मिलाकर 4 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
बारिश के वितरण में पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के बीच अंतर रहा। पूर्वी हिस्से में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज हुई, वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश में सामान्य के मुकाबले 12 प्रतिशत कम पानी गिरा।
जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग को मिलाकर पूर्वी हिस्से में बारिश सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक रही। हालांकि बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5 से 21 प्रतिशत तक कम बारिश हुई।
पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी अधिक रही। आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई।
इस बीच, प्रदेश के 25 जिलों में मानसून सीजन के दौरान सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा हो चुका है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।














