बालाघाट, 02 अक्टूबर।
मध्य प्रदेश के जनजातीय अंचल बालाघाट से बच्चों की असमय मौतों का गंभीर मामला इन दिनों खासा सुर्खियों में बना हुआ है। इसी बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सुदूर अंचल के जगला गांव का रुख किया। दौरे के दौरान उन्होंने उन आदिवासी परिवारों से सीधी बातचीत की जिन्होंने इस त्रासदी में अपनों को खोया है। पीड़ितजनों से चर्चा कर उन्होंने बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और सरकारी योजनाओं के लाभ की जमीनी हकीकत जानी। नेता प्रतिपक्ष ने इस स्थिति को बेहद चिंताजनक बताते हुए संसद में इस आवाज को बुलंद करने का संकल्प जताया है। हालांकि, इन बयानों को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं और बयानबाजी का दौर भी तेज हो गया है। दूसरी तरफ, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की शुरुआती रिपोर्टों में इस पूरे घटनाक्रम के आंकड़ों को लेकर भिन्नता देखने को मिलती है।
सरकारी महकमा जहां कुछ मौतों की पुष्टि करता है, वहीं स्थानीय स्तर पर इस संख्या को लेकर अलग ही दावे किए जाते रहे हैं। प्रभावित बस्तियों में बच्चों के बीमार पड़ने के बाद उनके रक्त के नमूने उच्च स्तरीय जांच के लिए बाहर भेजे गए थे। शुरुआती लक्षणों में बुखार और अन्य शिकायतें सामने आई थीं, जिनकी मेडिकल रिपोर्ट में खसरा और कुपोषण जैसी कई बातें उजागर हुईं। दुर्गम भौगोलिक बनावट के कारण इस क्षेत्र में स्वास्थ्य टीमों को पीड़ितों तक पहुंचने में खासी मशक्कत करनी पड़ी। प्रशासन ने एहतियातन बस्तियों में सघन टीकाकरण और चिकित्सा जांच का दायरा भी काफी बढ़ा दिया है।
राज्य के मुखिया ने पहले ही प्रभावित परिवारों तक पहुंचकर हरसंभव आर्थिक मदद का ऐलान किया था। साथ ही बुनियादी सुविधाओं और वनों से जुड़े अधिकारों का समाधान करने का भरोसा भी प्रशासनिक स्तर पर दिलाया गया है। सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इस विपक्षी दौरे को सिर्फ एक सियासी कदम करार दिया है। उनका कहना है कि घटना सामने आते ही सरकार ने त्वरित गति से तमाम राहत और बचाव के पुग्ता इंतजाम किए थे। इस मानवीय और राजनीतिक सरगर्मी के बीच यह संवेदनशील प्रकरण अब उच्च न्यायालय के दरवाजे तक पहुंच चुका है। अदालत के दखल के बाद इस पूरे मामले पर शासन से जवाब तलब किया गया है, जिससे प्रशासनिक हलचल और बढ़ गई है।














