नई दिल्ली, 03 अक्टूबर।
राजधानी दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में शनिवार को रेलवे टेंडर घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए, जहां विशेष न्यायाधीश प्रशांत कुमार ने औपचारिक रूप से आरोप तय करने की प्रक्रिया को टालते हुए इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 अक्टूबर की तारीख मुकर्रर की है। इससे पहले साल 2019 में अदालत द्वारा प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के मामलों में इन्हें एक-एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर नियमित जमानत प्रदान की जा चुकी है, जबकि पूर्व में सीबीआई से जुड़े मामले में अदालत ने पिछले वर्ष अक्टूबर में सभी मुख्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश भी जारी किए थे।
प्रवर्तन निदेशालय द्वारा सितंबर 2018 में दायर की गई चार्जशीट में लालू परिवार समेत कुल 16 लोगों व संस्थाओं को अभियुक्त बनाया गया था, जिसमें लारा प्रोजेक्ट, प्रेमचंद गुप्ता, सरला गुप्ता और सुजाता होटल जैसी कंपनियां व अन्य नाम शामिल हैं। केंद्रीय जांच एजेंसियों के अनुसार यह पूरा मामला तब का है जब लालू प्रसाद यादव देश के रेल मंत्री के पद पर आसीन थे और उन पर यह गंभीर आरोप है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान रांची तथा पुरी स्थित रेलवे के दो प्रमुख होटलों की देखभाल व रखरखाव के टेंडर नियमों को ताक पर रखकर कोचर बंधुओं की कंपनी सुजाता होटल को आबंटित किए थे।














