जैसलमेर, 03 अक्टूबर।
गंभीर रूप से संकटग्रस्त गोडावण को उसके प्राकृतिक आवास में फिर से बसाने की दिशा में राजस्थान में महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में कैप्टिव-ब्रेड गोडावण की रीवाइल्डिंग प्रक्रिया शुरू की।
पहले चरण में दो कैप्टिव-ब्रेड पक्षियों को सॉफ्ट-रिलीज सुविधा से विशेष बाड़े में स्थानांतरित किया जाएगा। इसके बाद रविवार को उन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी है। इसका उद्देश्य पक्षियों को धीरे-धीरे जंगल के वातावरण के अनुकूल बनाना और उनका स्वाभाविक व्यवहार विकसित करना है।
भूपेंद्र यादव ने गोडावण के थार क्षेत्र से सांस्कृतिक और भावनात्मक संबंध का उल्लेख करते हुए संरक्षण प्रयासों में वन विभाग, वैज्ञानिकों, स्थानीय समुदायों और केंद्र सरकार के अधिकारियों की भूमिका की सराहना की। भजन लाल शर्मा ने इसे राजस्थान के लिए गौरव का दिन बताया।
सम और रामदेवरा के संरक्षण केंद्रों में फिलहाल 97 गोडावण हैं। इनमें जंगल से मिले अंडों से जन्मे 40 और कैप्टिव ब्रीडिंग से पैदा हुए 57 पक्षी शामिल हैं। 86 पक्षियों को प्रजनन के लिए रखा गया है और 11 को जंगल में छोड़ने के लिए चिह्नित किया गया है।
कैप्टिव ब्रीडिंग के तहत 2025 में 24 और 2026 में 29 जीवित चूजे पैदा हुए। ‘जंपस्टार्ट’ प्रयोग में कैप्टिव-ब्रेड अंडों को गोडावण के प्राकृतिक घोंसलों में रखा गया। राजस्थान में छह और गुजरात में दो चूजे इस प्रयोग से पैदा हुए हैं।
डेजर्ट नेशनल पार्क में करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बाड़बंद घासभूमि विकसित की गई है। रामदेवरा में करीब 9.25 करोड़ रुपये की लागत से रीवाइल्डिंग एवियरी भी तैयार की गई है, जहां पक्षियों को उड़ान और प्राकृतिक परिस्थितियों के लिए तैयार किया जाएगा।














