नई दिल्ली, 05 अक्टूबर।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के राष्ट्रीय चिंतन शिविर में अधिकारियों और अभियंताओं से कहा कि योजना को केवल औपचारिक प्रक्रिया तक सीमित न रखें। उन्होंने धरातल पर सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं के ठोस और नए समाधान तलाशने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पीएमजीएसवाई का अगला चरण केवल सड़क निर्माण नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण संपर्क सुविधा सुनिश्चित करने वाला होना चाहिए।
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारी, मुख्य अभियंता और विशेषज्ञ शामिल हुए। चौहान ने बताया कि पीएमजीएसवाई के चौथे चरण में 62 हजार किलोमीटर नई सड़कों का लक्ष्य है। इनमें 20 हजार किलोमीटर को मंजूरी मिल चुकी है और इन्हें तय समय में पूरा करना है।
उन्होंने कहा कि गांवों का विकास देश की प्रगति की बुनियाद है। अपने बचपन का अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि गांव से भोपाल पढ़ने जाने के लिए उन्हें 13 किलोमीटर का रास्ता पगडंडियों और कीचड़ के बीच तय करना पड़ता था। उन्होंने सड़क के अभाव में मरीजों और गर्भवती महिलाओं को होने वाली परेशानियों का भी जिक्र किया।
चौहान ने स्वीकृति से निर्माण शुरू होने तक तय 72 दिनों की समय-सीमा का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए। बार-बार निविदा रद्द होने या बोली नहीं आने जैसी समस्याओं का समाधान पहले से तैयारी करके करने को कहा।
वन एवं पर्यावरण मंजूरी में देरी पर उन्होंने अधिकारियों को व्यक्तिगत स्तर पर संबंधित विभागों और जिला कलेक्टरों से समन्वय कर लंबित मामलों के निपटारे के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाढ़, भूस्खलन और अतिवृष्टि जैसी परिस्थितियों को देखते हुए सभी क्षेत्रों में एक जैसी निर्माण तकनीक लागू नहीं की जा सकती।
गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं करने की चेतावनी देते हुए चौहान ने खराब काम करने वाली एजेंसियों को प्रतिबंधित करने और उनके दोबारा दूसरे नाम से काम करने पर रोक लगाने को कहा। उन्होंने अधिकारियों से कार्यालयों तक सीमित रहने के बजाय मौके पर जाकर औचक निरीक्षण करने की भी बात कही।
गुणवत्ता के क्षेत्र में गुजरात, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और राजस्थान को बेहतर प्रदर्शन करने वाला बताया गया। रखरखाव में पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु आगे रहे। नई तकनीक में उत्तर प्रदेश और संपत्तियों की क्यूआर कोडिंग में असम के कार्य की सराहना की गई।
उन्होंने बताया कि निर्माण के बाद पांच वर्षों तक सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी की होती है। पीएम जनमन योजना के तहत छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र के गढ़चिरौली, झारखंड और आंध्र प्रदेश के दूरदराज व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से सड़क निर्माण करने के निर्देश भी दिए।














