चंडीगढ़, 05 अक्टूबर।
पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का आदेश दिया है। अदालत ने सीबीआई को मामला दर्ज कर दो महीने के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की पीठ ने यह निर्देश अधिवक्ता निखिल सर्राफ की याचिका पर दिया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन से जुड़े आरोपों के संबंध में पंजाब के डीजीपी को कई पत्र भेजे गए, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। याचिका के मुताबिक नितिन गोहल कथित तौर पर सरकारी लाभ पाने के इच्छुक लोगों और अधिकारियों के बीच बिचौलिए की भूमिका निभा रहा था। आरोपों में ट्रांसफर-पोस्टिंग, गोपनीय सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच, हथियार लाइसेंस और अन्य प्रशासनिक लाभ दिलाने की बात शामिल है।
ईडी की जांच में नितिन गोहल, रियल एस्टेट कारोबारी अजय सहगल, सुरेश कुमार बजाज समेत अन्य लोगों के नाम सामने आने की बात कही गई है। जांच में मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन से जुड़े संपर्कों का भी उल्लेख किया गया। आरोप है कि कुछ लोग अधिकारियों की नियुक्ति, तबादलों और अन्य प्रशासनिक निर्णयों को प्रभावित करने के लिए मध्यस्थ के रूप में काम कर रहे थे। मई 2026 में ईडी ने संबंधित लोगों के परिसरों पर तलाशी ली थी, जहां दस्तावेज और डिजिटल सामग्री मिलने तथा करीब एक करोड़ रुपये नकद बरामद होने का दावा किया गया। ईडी के पत्रों के बाद पंजाब पुलिस ने सीधे एफआईआर दर्ज करने के बजाय ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन से कानूनी राय मांगी थी। सितंबर में ईडी ने अदालत को बताया कि कई पत्र भेजे जाने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं हुई। अगस्त में हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार से जवाब मांगा था और आरोपों को गंभीर बताते हुए विस्तृत जवाब की अपेक्षा जताई थी। सितंबर में फैसला सुरक्षित रखने के बाद सोमवार को अदालत ने सीबीआई जांच के आदेश दिए।














