कोलकाता, 05 अक्टूबर।
दुर्गा पूजा से पहले ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस के सामने वित्तीय संकट गहरा गया है। पार्टी का कहना है कि अदालत की निगरानी में गठित विशेष अधिकारी न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सुब्रत तालुकदार की समिति से अनुरोध किए जाने के बावजूद आवश्यक धनराशि जारी नहीं हो पा रही है। इससे पार्टी कार्यालय के कर्मचारियों के वेतन और भवन के किराये जैसे जरूरी खर्च प्रभावित हुए हैं। धनराशि जारी कराने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए पार्टी ने सोमवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में अर्जी लगाई, लेकिन अदालत ने मामले की तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। अब इसकी सुनवाई दुर्गा पूजा की छुट्टियों के बाद न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ के समक्ष होने की संभावना है। दरअसल, कथित अवैध वित्तीय लेनदेन के आरोपों के बाद एक निजी बैंक में पार्टी के तीन खातों को फ्रीज किया गया था। इसके खिलाफ दायर याचिका पर अदालत ने रोजमर्रा के जरूरी खर्चों के लिए सीमित धन के इस्तेमाल की अनुमति दी थी और लेनदेन की निगरानी के लिए विशेष अधिकारी की व्यवस्था की थी। यह व्यवस्था अगले वर्ष 29 जनवरी तक लागू रहनी है।
इसी बीच कालीघाट तृणमूल और ऋतब्रत गुट के बीच विवाद के चलते चुनाव आयोग ने 'अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस' नाम और पार्टी के चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया था। राज्य सरकार ने इसी आधार पर पार्टी के बैंक खातों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की थी। उसका तर्क था कि चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में इस नाम से कोई सक्रिय दल नहीं है और चुनाव चिह्न भी फ्रीज है। हालांकि, न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने यह दलील स्वीकार नहीं की और 29 जनवरी तक जरूरी खर्चों के लिए धन के इस्तेमाल की अनुमति बरकरार रखी। सोमवार को पार्टी के वकीलों ने अदालत को बताया कि विशेष अधिकारी ने चुनाव आयोग से यह स्पष्ट करने को कहा है कि नाम और चुनाव चिह्न केवल आगामी विधानसभा उपचुनावों तक फ्रीज हैं या स्थायी रूप से। इस स्पष्टीकरण के लिए जानकारी मांगे जाने के बाद धन की निकासी रुक गई है। नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर छह अक्टूबर को प्रस्तावित उपचुनावों के बीच फंड की कमी से कर्मचारियों के वेतन और चुनावी तैयारियों पर असर पड़ने की बात कही गई है, जबकि तत्काल सुनवाई नहीं मिलने से पार्टी को फिलहाल राहत नहीं मिली है।














