नई दिल्ली, 05 अक्टूबर।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने वर्ष 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति विवेक चौधरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले में एसआईटी गठित करने की मांग को स्वीकार नहीं किया। अदालत में दाखिल दो अलग-अलग याचिकाओं में हिंसा और कथित भड़काऊ भाषणों से जुड़े नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने तथा जांच कराने की मांग की गई थी। एक याचिका शेख मुज्तबा ने दाखिल की थी, जिसमें भाजपा नेताओं कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर, प्रवेश वर्मा और अभय वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। याचिका में दिल्ली पुलिस की भूमिका की भी जांच की मांग उठाई गई थी।
दूसरी याचिका लॉयर्स वॉयस की ओर से दायर की गई थी, जिसमें राहुल गांधी, सोनिया गांधी, मनीष सिसोदिया और असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। दिल्ली पुलिस ने एसआईटी जांच का विरोध करते हुए अदालत को बताया कि हिंसा से जुड़े मामलों की जांच निष्पक्ष और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है। पुलिस ने याचिकाकर्ताओं के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि सभी मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच जारी है, इसलिए एसआईटी को जांच सौंपने की आवश्यकता नहीं है। इससे पहले 12 मार्च 2020 को उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस और संबंधित नेताओं को नोटिस जारी किए थे। फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई थी और करीब 200 लोग घायल हुए थे।














