चंडीगढ़, 05 अक्टूबर।
पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की लंबित महंगाई भत्ता (डीए) किश्तों के मामले में पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा से सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिका की स्थिति रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को तय की है और मुख्य सचिव को उस दौरान उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। हाई कोर्ट ने तीन अगस्त के आदेश में पंजाब सरकार को 15 दिन के भीतर बकाया डीए किश्तों का भुगतान करने को कहा था, लेकिन राज्य सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। वहां अभी तक मामले पर सुनवाई शुरू नहीं हुई है। सोमवार की सुनवाई में मुख्य सचिव अदालत के समक्ष पेश हुए। हाई कोर्ट ने पहले कहा था कि यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई नहीं करा पाती है, तो वह स्वयं मामले की सुनवाई आगे बढ़ाएगा।
डीए भुगतान का विवाद छठे पंजाब वेतन आयोग की सिफारिशों से भी जुड़ा है, जिसमें केंद्र सरकार के पैटर्न के आधार पर महंगाई भत्ता जारी रखने की बात कही गई थी। हाई कोर्ट ने अपने तीन अगस्त के आदेश में लंबित किश्तों के भुगतान के साथ यह भी स्पष्ट किया था कि तय अवधि में भुगतान नहीं होने पर बकाया राशि पर छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देना होगा। यह ब्याज निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद वास्तविक भुगतान तक लागू रहेगा। सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स लंबे समय से लंबित किश्तों और एरियर के भुगतान की मांग कर रहे हैं। अगस्त और सितंबर में इस मुद्दे को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन भी हुआ था। आठ सितंबर को सरकार ने आंदोलन के दौरान ड्यूटी से अनुपस्थित कर्मचारियों पर ‘नो वर्क, नो पे’ लागू करने का आदेश दिया था। इसके बाद कर्मचारी प्रतिनिधियों की मुख्य सचिव के साथ बैठक हुई, जिसके बाद मुख्यमंत्री के साथ बैठक का रास्ता भी खुला।













