नई दिल्ली, 05 अक्टूबर।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार सुबह संस्कृत के प्रसिद्ध ग्रंथ हितोपदेश के एक श्लोक को साझा करते हुए मनुष्य के सात महत्वपूर्ण गुणों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने श्लोक के माध्यम से हृदय की शुद्धता, त्याग, साहस, सुख-दुःख में समान भाव, दक्षता, अनुराग और सत्यनिष्ठा को श्रेष्ठ मानवीय गुण बताया। साझा किए गए श्लोक में कहा गया है कि ये गुण अच्छे मित्र की पहचान होने के साथ-साथ उदार हृदय और विशिष्ट व्यक्तित्व वाले व्यक्ति की विशेषताएं भी हैं। प्रधानमंत्री द्वारा बताए गए अर्थ के अनुसार मनुष्य की वास्तविक पहचान केवल उसके व्यवहार से नहीं, बल्कि उसकी निर्मल सोच, त्याग की भावना, साहस, परिस्थितियों में संतुलन, कुशलता, आत्मीयता और सच्चाई से होती है।
प्रधानमंत्री का यह संदेश मानव जीवन में विचार और आचरण के महत्व को रेखांकित करता है। मनुष्य को अन्य जीवों से अलग उसकी सोचने, समझने और विवेकपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता बनाती है। इसी कारण उसके व्यक्तित्व की श्रेष्ठता उसके विचारों और व्यवहार से निर्धारित होती है। श्लोक में बताए गए गुण इसी मानवीय विशेषता को बेहतर आचरण के रूप में सामने रखते हैं। संदेश का मूल भाव यह है कि मनुष्य की विशिष्टता केवल उसकी बौद्धिक क्षमता में नहीं, बल्कि उस क्षमता का उपयोग किस प्रकार के विचार और आचरण के लिए किया जाता है, इसमें भी निहित है।














