नई दिल्ली, 06 अक्टूबर।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगी दलों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा फॉर्म-6 विवाद को लेकर जमकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष संवैधानिक और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाकर राहुल गांधी को राजनीतिक रूप से स्थापित करने के लिए सुनियोजित षड्यंत्र रच रहा है। पात्रा ने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से सेना, सुप्रीम कोर्ट, ईवीएम और हिंदू समाज के बाद अब निर्वाचन आयोग को निशाना बनाकर देश में अनावश्यक भ्रम और अविश्वास का माहौल पैदा किया जा रहा है। ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए भाजपा नेता ने स्पष्ट किया कि उन्होंने 19 फरवरी 2025 को मुख्य चुनाव आयुक्त का पदभार संभाला था, जबकि 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव उससे पहले ही संपन्न हो चुके थे, इसलिए भाजपा की जीत को मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त से जोड़ना पूरी तरह से तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक है, हालांकि वे मार्च 2024 से चुनाव आयोग का हिस्सा अवश्य रहे हैं।
इसके साथ ही, फॉर्म-6 में बदलाव और सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही कथित फर्जी खबरों पर बोलते हुए संबित पात्रा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका पर केवल नोटिस जारी किया जाना न्यायिक प्रक्रिया का एक सामान्य हिस्सा है, जिसका अर्थ यह कतई नहीं है कि याचिका में लगाए गए तमाम आरोप प्रमाणित हो चुके हैं। कांग्रेस द्वारा लगाए गए एकतरफा और गैरकानूनी बदलाव के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कोर्ट के अंतिम फैसले तक इंतजार करने की सलाह दी। ईवीएम के मुद्दे पर कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए पात्रा ने तंज कसा कि आज जो पार्टी बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग को लेकर मार्च निकाल रही है, उसे यह नहीं भूलना चाहिए कि देश में ईवीएम के इस्तेमाल का कानूनी मार्ग राजीव गांधी के कार्यकाल के दौरान वर्ष 1989 में हुए चुनाव कानून संशोधन के जरिए ही प्रशस्त हुआ था। अंत में उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी संवैधानिक संस्था पर आरोप मढ़ने से पहले राजनीतिक दलों को उसके कानूनी पहलुओं और पुख्ता तथ्यों की पूरी समझ होनी चाहिए।














