विशाखापत्तनम, 06 अक्टूबर।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत की समुद्री शक्ति और रक्षा क्षमता को मजबूत करने के लिए एक सशक्त एवं एकीकृत समुद्री तंत्र विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने मंगलवार को हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (एचएसएल) में फ्लीट सपोर्ट शिप-1 का जलावतरण किया, फ्लीट सपोर्ट शिप-5 की कील रखी और उन्नत स्लिपवे-4 के साथ 300 टन क्षमता वाली गोलियथ क्रेन का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि ‘सूर्या’ नामक फ्लीट सपोर्ट शिप-1 भारतीय नौसेना की पहुंच, लंबे समय तक समुद्री अभियानों को जारी रखने की क्षमता और परिचालन प्रभावशीलता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वहीं, नए स्लिपवे और गोलियथ क्रेन से एचएसएल में बड़े जहाजों के निर्माण की क्षमता बढ़ेगी। सिंह ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना ने संकट के समय प्रथम प्रतिक्रिया देने वाले और भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार के रूप में अपनी भूमिका साबित की है। मानवीय सहायता, आपदा राहत, समुद्री डकैती रोधी अभियान और निकासी अभियानों में भी नौसेना का योगदान महत्वपूर्ण रहा है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि एचएसएल आठ दशक से अधिक समय से देश की समुद्री और रक्षा जरूरतों को पूरा करने में योगदान दे रहा है तथा वर्ष 2025 में मिला मिनीरत्न श्रेणी-1 का दर्जा उसके बदलाव और बेहतर वित्तीय स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने नौसेना, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), शिपयार्ड, शिक्षण संस्थानों, उद्योग, एमएसएमई और स्टार्टअप को एकजुट होकर राष्ट्रीय समुद्री तंत्र को मजबूत करने की जरूरत बताई। सिंह के अनुसार भारत में जहाज निर्माण की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन इन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा और वास्तविक क्षमता में बदलने के लिए समय पर डिलीवरी, उत्पादकता, स्वदेशी डिजाइन, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला, कुशल मानव संसाधन, क्षमता विस्तार और लागत प्रतिस्पर्धा पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है और भारत आयात पर निर्भरता घटाकर उन्नत रक्षा प्रणालियों के घरेलू डिजाइन व निर्माण की दिशा में आगे बढ़ा है। वर्ष 2047 तक विकसित, आत्मनिर्भर, सुरक्षित और समृद्ध भारत के लक्ष्य में मजबूत समुद्री शक्ति की अहम भूमिका होगी।














