भोपाल, 06 अक्टूबर।
एमसीयू में आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन अद्वैत जीवन दृष्टि, भाषा और पत्रकारिता से जुड़े विषयों पर वक्ताओं ने विद्यार्थियों से संवाद किया। आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास की स्वामिनी सदविद्यानंद सरस्वती ने कहा कि भारतीय शास्त्रों में एकात्मता को अंतिम सत्य माना गया है। संसार में दिखाई देने वाले भेद द्वंद्व और भय को जन्म देते हैं, जबकि एकात्म भाव अशांति को दूर करता है।
उन्होंने कहा कि वेद ज्ञान का आधार हैं और ज्ञान सार्वभौमिक होता है। उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि आयोजन विद्यार्थियों को वैदिक परंपरा और उसके विचारों को समझने का अवसर देता है। उन्होंने युवाओं से व्याख्यानों के महत्वपूर्ण विचारों को जीवन में अपनाने का आग्रह किया।
दूसरे सत्र में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मनोज श्रीवास्तव ने डिजिटल युग में भाषा के बदलते स्वरूप पर विचार रखे। उन्होंने श्रुति-स्मृति से लेकर मुद्रण और डिजिटल माध्यम तक भाषा की यात्रा समझाई।
वरिष्ठ पत्रकार ब्रजेश राजपूत ने टेलीविजन पत्रकारिता के अनुभव साझा करते हुए विभिन्न मानवीय कहानियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हर कहानी में दर्द, खुशी, सवाल और समाधान छिपा होता है।














