नई दिल्ली, 06 अक्टूबर।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग और 'वोट चोरी' के कथित मुद्दों को लेकर इंडी गठबंधन के 19 विपक्षी दलों द्वारा आहूत "सेव डेमोक्रेसी मार्च" मंगलवार को राजधानी दिल्ली में एक बड़े राजनीतिक टकराव और प्रदर्शन में तब्दील हो गया। संसद क्षेत्र से चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर बढ़ रहे विपक्षी नेताओं के जुलूस को भारी पुलिस सुरक्षा और बैरिकेडिंग के चलते जब रास्ते में ही रोक दिया गया, तो लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तिरंगा थामे बैरिकेड्स पर चढ़कर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करते नजर आए। इसके पश्चात, राहुल गांधी, सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और कई अन्य दिग्गज नेता चुनाव आयोग कार्यालय से महज कुछ ही दूरी पर स्थित आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंचकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए, जहां उनके समर्थन में पहुंचे कांग्रेस व एनएसयूआई कार्यकर्ताओं के हंगामे और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के बीच स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई।


इस उथल-पुथल भरे घटनाक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए दिल्ली पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) और ड्रोन कैमरों से कड़ी निगरानी रखी गई तथा धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई, जबकि पुलिस कार्रवाई के तहत समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, टीएमसी के डेरेक ओ'ब्रायन और अभिषेक बनर्जी समेत कई प्रमुख विपक्षी नेताओं को हिरासत में लेकर बसों से हटाया गया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सपा सांसद जया बच्चन व धर्मेंद्र यादव ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया और सत्तापक्ष की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इससे दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग के मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। इस संयुक्त आंदोलन के तहत इंडी गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त के त्यागपत्र, एसआईआर प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने, मतदाता सूची में पूर्ण पारदर्शिता बरतने और भविष्य के चुनावों में दोबारा मतपत्र प्रणाली लागू करने जैसी पांच सूत्रीय प्रमुख मांगें उठाई हैं।

















