नई दिल्ली, 07 अक्टूबर।
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के आईपीएस अधिकारी तदाशा मिश्रा की राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के रूप में नियुक्ति को चुनौती देने वाली केंद्र सरकार की अवमानना याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दे दी है। केंद्र का आरोप है कि मिश्रा को उनकी सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले डीजीपी नियुक्त किया गया था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष याचिका का उल्लेख करते हुए इसे पहले से लंबित संबंधित याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। अदालत ने मामले की सुनवाई 8 अक्टूबर को करने का निर्देश दिया है। केंद्र सरकार के मुताबिक तदाशा मिश्रा को 30 दिसंबर 2025 को उनकी सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले झारखंड का डीजीपी नियुक्त किया गया था। केंद्र का कहना है कि यह नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह फैसले में निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है।
प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट ने डीजीपी की नियुक्ति के लिए स्पष्ट प्रक्रिया तय की थी। इसके तहत राज्य सरकार को यूपीएससी द्वारा तैयार किए गए तीन वरिष्ठतम अधिकारियों के पैनल में से डीजीपी का चयन करना होता है और नियुक्त अधिकारी का कार्यकाल कम से कम दो वर्ष का होना चाहिए। नियुक्ति से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त एमिकस क्यूरी राजू रामचंद्रन ने भी कहा था कि अदालत के दिशा-निर्देशों के अनुसार ऐसे अधिकारी को डीजीपी बनाया जाना चाहिए जिसकी सेवा में कम से कम छह महीने शेष हों। केंद्र सरकार का आरोप है कि तदाशा मिश्रा की नियुक्ति इन शर्तों के विपरीत की गई। अब सुप्रीम कोर्ट 8 अक्टूबर को अवमानना याचिका पर सुनवाई करेगा।













