नई दिल्ली, 07 अक्टूबर।
दिल्ली उच्च न्यायालय के जस्टिस प्रतीक जालान ने दिल्ली जिमखाना क्लब को खाली कराने से जुड़ी केंद्र सरकार की कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने मामले को ऐसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया, जिसमें वह स्वयं शामिल न हों। मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी। इस विवाद से संबंधित तीन याचिकाएं अदालत में दाखिल की गई हैं। इनमें एक क्लब सदस्य विजय खुराना, दूसरी क्लब स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन और तीसरी दिल्ली जिमखाना क्लब की ओर से दायर की गई है। भूमि एवं संपदा कार्यालय के एस्टेट अधिकारी ने 22 मई को क्लब को कारण बताओ नोटिस जारी कर 5 जून तक परिसर खाली करने को कहा था। खुराना का कहना है कि क्लब के करीब 500 सदस्य स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन के माध्यम से दायर याचिका का समर्थन कर रहे हैं। इससे पहले 26 मई को उच्च न्यायालय ने परिसर खाली करने के नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था, लेकिन नोटिस पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था। जस्टिस अवनीश झींगन की पीठ ने केंद्र की उस दलील पर गौर किया था कि नोटिस जारी किए बिना क्लब खाली कराने की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि क्लब को खाली कराने से पहले कानून के अनुसार नोटिस दिया जाएगा और यह कहना सही नहीं है कि सरकार क्लब का प्रबंधन अपने हाथ में लेने जा रही है। इस पर अदालत ने कहा था कि जब नोटिस के अनुसार ही कार्रवाई की जानी है तो उस पर रोक लगाने का तत्काल कोई आधार नहीं बनता। दिल्ली जिमखाना क्लब ने इसके बाद परिसर खाली करने के केंद्र के नोटिस को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया। वहीं केंद्र सरकार ने भी क्लब परिसर को खाली कराने की अनुमति देने की मांग करते हुए अदालत में याचिका दाखिल की है। केंद्र का तर्क है कि जिमखाना क्लब प्रधानमंत्री आवास और अन्य महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रतिष्ठानों के नजदीक स्थित है तथा रक्षा और दूसरी महत्वपूर्ण आधारभूत संरचनाओं को मजबूत करने के लिए क्लब की भूमि की आवश्यकता है।













