नई दिल्ली, 07 अक्टूबर।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित ‘विकसित भारत संकल्प सभा’ को संबोधित करते हुए वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने, दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करने और देश को मजबूत मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने के लक्ष्य पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत के सामने चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन 140 करोड़ देशवासियों के रूप में देश के पास 140 करोड़ समाधान भी हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “आज दुनिया भारत के पायलट की बात कर रही है। एक दिन ऐसा भी आएगा जब दुनिया ‘मेड इन इंडिया’ विमान की बात करेगी।” उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य दूरदर्शी नीतियों और लगातार कड़ी मेहनत से हासिल किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब देश के लिए ऐसे बड़े, असाधारण और महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय करने का समय है, जिनमें बेहतर भारत, गरीबी से मुक्त भारत और हर क्षेत्र में नेतृत्व करने वाला भारत शामिल हो। शिक्षा, मनोरंजन, स्वास्थ्य और कल्याण, खेल, इनोवेशन और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में दुनिया भारत की ओर देखे और हर क्षेत्र में तिरंगा गर्व के साथ लहराए, यही लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2026 में देखा जा रहा विकसित भारत का सपना जरूर पूरा होगा और भारत अब रुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि 100 साल पहले देश की आबादी 40 करोड़ से भी कम थी, जबकि आज 140 करोड़ से ज्यादा देशवासी हैं और यही शक्ति 2047 का विकसित भारत बनाएगी।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरबिंदो के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद ने एक अद्भुत, गौरवशाली और महान भारत के उदय की बात कही थी, जबकि महर्षि अरबिंदो ने कहा था कि भारत के भाग्य का सूरज जरूर उगेगा और उसकी रोशनी पूरे विश्व को आलोकित करेगी। उन्होंने कहा कि अदम्य साहस और अमिट जिजीविषा में तपे पूर्वजों की संतान होने के नाते आज देश के पास अपने सपनों को पूरा करने की स्वतंत्रता और सामर्थ्य दोनों हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब देश खुद अपनी नियति का नियंता है। उन्होंने गरीबी कम करने की उपलब्धि का जिक्र करते हुए कहा कि जो बात कभी नामुमकिन लगती थी, वह संभव हुई और एक दशक के भीतर 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले। उन्होंने कहा कि 25 वर्षों के अनुभव के बाद वह पूरे भरोसे के साथ कह सकते हैं कि देश अपनी आंखों के सामने भारत का बदलाव देख रहा है।
‘विकसित भारत संकल्प सभा’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में और ‘सेवा ज्योति यात्रा’ के तहत आयोजित प्रमुख राष्ट्रीय एवं राज्यस्तरीय कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाना और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक सुनिश्चित करना है। प्रधानमंत्री ने 25 वर्षों की जनसेवा यात्रा के लिए देशवासियों का आभार जताते हुए कहा कि देश ने उन्हें बहुत कुछ दिया है, इसलिए देश के प्रति उनका दायित्व भी सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि 25 वर्षों का जनविश्वास और अनुभव उनकी बड़ी पूंजी है, लेकिन यह पूंजी केवल उनकी नहीं बल्कि पूरे देश की है और मां भारती की हर संतान इस पूंजी की अधिकारी है।
प्रधानमंत्री ने अपने राजनीतिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने की यात्रा को याद करते हुए कहा कि 7 अक्टूबर 2001 को जब उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, तब उन्होंने नहीं सोचा था कि एक दिन जनसेवा की यात्रा में 25 वर्ष का पड़ाव आएगा। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रमुख के रूप में निरंतर सेवा करते हुए 25 वर्ष पूरे होना देशवासियों के निरंतर आशीर्वाद का परिणाम है। उन्होंने जनता-जनार्दन, भाजपा, एनडीए और लोकतंत्र में गहरी आस्था रखने वाले सभी राजनीतिक साथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वह देश की जनता के चरणों में शीश झुकाकर नमन करते हैं, क्योंकि जनता का विश्वास ही उनकी सेवा यात्रा की सबसे बड़ी शक्ति रहा है। उन्होंने विधानसभा और लोकसभा के कई चुनावों के दौरान जनता द्वारा लगातार सेवा का अवसर दिए जाने के लिए भारत के लोकतंत्र और संविधान को भी नमन किया तथा ‘सेवा ज्योति यात्रा’ में शामिल नागरिकों का अभिनंदन किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके लिए जनता-जनार्दन ईश्वर का ही रूप है। उन्होंने कहा कि आज वह जो कुछ हैं, जहां हैं और जिस दायित्व पर हैं, उसमें सबसे बड़ा योगदान जनता का है। लाखों-करोड़ों देशवासियों का विश्वास और लाखों कार्यकर्ताओं का परिश्रम उनकी सबसे बड़ी शक्ति रहा है। उन्होंने बताया कि बुधवार सुबह उन्होंने श्री विनायक मंदिर में दर्शन किए और परमात्मा के सामने देश तथा 140 करोड़ भारतवासियों के लिए प्रार्थना की। उन्होंने अपने लिए भी यही प्रार्थना की कि परमात्मा उन्हें इतनी शक्ति और सामर्थ्य दें कि वह देश के लिए और अधिक ऊर्जा के साथ काम कर सकें और दिन-रात देशवासियों की सेवा करते रहें।
अपने 25 वर्षों के सफर को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें सिर्फ शुक्रगुजारी महसूस होती है। उन्होंने कहा कि जीवन में मिले हर व्यक्ति और हर अनुभव ने उन्हें कुछ न कुछ सिखाया। जिन्होंने उन्हें सिखाया, उन्होंने विनम्रता सिखाई, जबकि जिन्होंने उन्हें गिराया, उन्होंने दोबारा उठना सिखाया। समर्थकों ने उनका हौसला बढ़ाया और आलोचकों ने उन्हें अपने भीतर झांकना सिखाया। जो लोग उनके साथ खड़े रहे, उन्होंने उन्हें भरोसे की ताकत का अनुभव कराया। प्रधानमंत्री ने अपने राजनीतिक सफर और बचपन की यादों को साझा करते हुए कहा कि उन्होंने कभी पद की चाहत के लिए जीवन नहीं जिया। वह ‘एम्बिशन’ के बजाय ‘मिशन’ के लिए जीने वाले व्यक्ति रहे हैं और उनका पूरा सफर देश की सामूहिक शक्ति तथा संकल्प को समर्पित रहा है। उन्होंने कहा कि कर्म ही उनका सबसे बड़ा धर्म है और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा या पद से बढ़कर उनके लिए राष्ट्रसेवा तथा कर्तव्य सर्वोपरि रहे हैं। उनके जीवन का मार्ग निष्काम भाव से देश की सेवा करना रहा है।
देश की प्रगति का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र में रिकॉर्ड वृद्धि और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का भी जिक्र किया। उन्होंने समाज को वोट बैंक की राजनीति के आधार पर बांटने की प्रवृत्तियों पर विचार रखते हुए कहा कि देश की समस्याओं का समाधान हर नागरिक के लिए समान रूप से होना चाहिए। उन्होंने इसे ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मूल मंत्र से जोड़ा। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की युवा शक्ति में आज अभूतपूर्व ऊर्जा और आत्मविश्वास दिखाई दे रहा है और यह शक्ति भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ देशवासी मिलकर 2047 का विकसित भारत बनाएंगे और जरूर बनाएंगे।














