चेन्नई, 16 मई।
श्रीलंका के सांसद रामनाथन अर्जुनन ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय से श्रीलंकाई तमिलों और तमिल ईलम से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशील एवं न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इन विषयों पर गंभीरता से विचार करते हुए पीड़ित समुदाय के हित में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
चेन्नई सचिवालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि यह उनकी तमिलनाडु की दूसरी यात्रा है। उन्होंने कहा कि केवल तमिल भाषा बोलने के कारण श्रीलंका में तीन लाख से अधिक तमिलों के नरसंहार का इतिहास रहा है और मई का महीना उस पीड़ा की याद दिलाता है।
उन्होंने स्वयं को तमिल समुदाय के दर्द और संघर्ष को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाने वाला जनप्रतिनिधि बताया और कहा कि इसी उद्देश्य से वह तमिलनाडु आए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री विजय और मंत्रियों से मुलाकात की उम्मीद नहीं थी, लेकिन जिस दिन विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, उसी दिन वे श्रीलंका की संसद में उपस्थित थे।
रामनाथन अर्जुनन ने तमिल आंदोलन के नेताओं कुट्टिमनी और थंगथुराई का उल्लेख करते हुए कहा कि जेल में हत्या से पहले उनके कथन तमिल पहचान और संघर्ष की गहराई को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में हुए राजनीतिक परिवर्तन का अनुमान उन्होंने पहले ही लगा लिया था और यह बदलाव ऐतिहासिक है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विजय की भूमिका केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर में बसे तमिल भाषी समुदाय के लिए भी महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से दशकों लंबे संघर्ष के बाद पीड़ा झेल रहे ईलम तमिल समुदाय के लिए उनकी आवाज और कदम निर्णायक हो सकते हैं।
सांसद ने तमिल ईलम के लोगों की ओर से आग्रह करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर निर्णय जल्दबाजी में नहीं, बल्कि गंभीर विचार-विमर्श के साथ लिए जाएं, ताकि पीड़ित समुदाय को भरोसा और राहत मिल सके।
उन्होंने यह भी कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने श्रीलंका में तमिलों के विनाश को गंभीरता से नहीं लिया, हालांकि वर्तमान मुख्यमंत्री विजय ने उस समय समर्थन में अनशन आंदोलन किए थे। साथ ही उन्होंने कुछ नेताओं पर आरोप लगाया कि वे तमिलों की पीड़ा का राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग कर रहे हैं।















