मुंबई, 09 मई।
देश में निवेश को लेकर सोच और भागीदारी दोनों में तेजी से परिवर्तन देखने को मिल रहा है। अब निवेश केवल बड़े शहरों या सीमित वर्ग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि छोटे शहरों के लोग, युवा और महिलाएं भी बड़ी संख्या में इससे जुड़ रहे हैं। पिछले दस वर्षों में खुदरा निवेश के क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है और म्यूचुअल फंड एसआईपी का दायरा कई गुना बढ़ चुका है।
ग्रो के दसवें स्थापना दिवस के अवसर पर मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ललित केशरे ने कहा कि देश में खुदरा निवेश का विस्तार अब महानगरों से आगे निकलकर व्यापक स्तर पर हो चुका है। उन्होंने बताया कि इसमें युवाओं और महिला निवेशकों की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि पिछले एक दशक में म्यूचुअल फंड के अंतर्गत प्रबंधित परिसंपत्तियां लगभग बारह लाख करोड़ रुपये से बढ़कर अस्सी लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई हैं। वहीं मासिक एसआईपी निवेश भी तीन हजार करोड़ रुपये से बढ़कर दस गुना से अधिक स्तर पर पहुंच गया है।
ललित केशरे के अनुसार अब आम लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आया है और वे केवल आय अर्जन तक सीमित न रहकर भविष्य के लिए संपत्ति निर्माण और वित्तीय सुरक्षा पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पहले निवेश का दायरा मुख्य रूप से बड़े शहरों तक सीमित था, लेकिन अब उत्तर प्रदेश, बिहार, पूर्वोत्तर राज्यों और अन्य छोटे शहरों से भी बड़ी संख्या में लोग बाजार से जुड़ रहे हैं, जिससे वित्तीय जागरूकता में तेज वृद्धि देखी जा रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और सरल निवेश विकल्पों के कारण टियर-2 और टियर-3 शहरों में निवेश की पहुंच और आसान हुई है, जिससे आम लोगों के लिए निवेश प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुगम हो गई है।
उनके अनुसार अब नए निवेशकों में महिलाओं की भागीदारी लगभग एक चौथाई तक पहुंच चुकी है, जो भारतीय वित्तीय बाजारों की बढ़ती परिपक्वता का संकेत है और यह भी दर्शाता है कि परिवारों के वित्तीय निर्णयों में महिलाओं की भूमिका मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में डीप-टेक क्षेत्र भारत के मूल्य निर्माण का सबसे बड़ा आधार बनेगा, जिससे तकनीक और नवाचार देश की आर्थिक प्रगति को नई दिशा देंगे।










