हुगली, 26 मार्च।
मध्य प्रदेश की उत्तरपाड़ा विधानसभा सीट 2026 के चुनाव में सिर्फ एक सीट की लड़ाई नहीं, बल्कि बदलते जनादेश और रणनीतिक संतुलन की परीक्षा बनकर उभर रही है। इस बार टीएमसी ने शीर्षण्य बंदोपाध्याय, माकपा ने मीनाक्षी मुखोपाध्याय और भाजपा ने दीपांजन चक्रवर्ती को मैदान में उतारकर मुकाबले को पूरी तरह त्रिकोणीय कर दिया है।
2016 में टीएमसी को लगभग 45 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस-वाम गठबंधन ने 39 प्रतिशत वोट हासिल किए थे। भाजपा उस समय सिर्फ 13 प्रतिशत वोट पर सिमट गई थी। टीएमसी ने 9 प्रतिशत वोट अंतर से जीत दर्ज की थी। 2021 में समीकरण बदल गया और टीएमसी ने 47 प्रतिशत वोट शेयर बनाए रखा। भाजपा ने 29 प्रतिशत और माकपा 16 प्रतिशत वोट हासिल किए। इस बार भाजपा ने वाम के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाकर मुख्य चुनौती के रूप में खुद को स्थापित कर लिया।
2026 में टीएमसी 47 प्रतिशत स्थिर वोट शेयर बनाए रखने की कोशिश कर रही है। भाजपा अपने 29 प्रतिशत वोट को लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ाना चाहती है। माकपा मीनाक्षी मुखोपाध्याय के जरिए 20-25 प्रतिशत वोट हासिल करने की रणनीति पर काम कर रही है।
उम्मीदवारों की प्रोफाइल मुकाबले को और दिलचस्प बनाती है। टीएमसी के शीर्षण्य बंद्योपाध्याय, सांसद कल्याण बनर्जी के पुत्र और अधिवक्ता हैं। माकपा की मीनाक्षी मुखोपाध्याय युवा और आंदोलनकारी नेता हैं। भाजपा के दीपांजन चक्रवर्ती पूर्व एनएसजी कमांडो हैं और शहरी मतदाताओं के बीच पैठ बनाने में जुटे हैं।
लगभग 2.5 लाख मतदाताओं वाली सीट पर 2021 में 77 प्रतिशत मतदान हुआ था। शहरी और अर्ध-शहरी चरित्र, मध्यम वर्ग की निर्णायक भूमिका और युवाओं की बढ़ती भागीदारी चुनावी समीकरण को और जटिल बनाती है। केवल 2-3 प्रतिशत वोट का स्विंग भी हजारों वोटों का अंतर पैदा कर सकता है।
कुल मिलाकर उत्तरपाड़ा 2026 में एक ऐसी सीट बनकर उभर रही है, जहां वोट प्रतिशत, उम्मीदवारों की पकड़ और ध्रुवीकरण नतीजा तय करेंगे। यह मुकाबला न सिर्फ स्थानीय राजनीति का आईना होगा, बल्कि पश्चिम बंगाल की सियासत की दिशा भी बताएगा।












