नई दिल्ली, 08 अप्रैल।
रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का निर्णय लिया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने तीन दिवसीय बैठक के बाद बताया कि मौद्रिक नीति समिति ने आम सहमति से यह निर्णय लिया।
मल्होत्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट से आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव पड़ा है, लेकिन अन्य देशों की तुलना में भारत की आर्थिक नींव मजबूत बनी हुई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान संकट महंगाई के जोखिम को बढ़ा सकता है।
गवर्नर ने कहा कि मौजूदा समय में नीतिगत दरों में कटौती से अधिक जरूरी है कि आर्थिक गतिविधियों का समर्थन किया जाए और विकास दर बनाए रखी जाए।
रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर रिजर्व बैंक बैंकों को अल्पकालिक ऋण उपलब्ध कराता है। इसका सीधा असर लोन, ईएमआई, बचत और निवेश पर पड़ता है।
ज्ञात हो कि पिछली वित्तीय वर्ष की फरवरी में भी रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखा गया था। फरवरी 2025 से अब तक कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की जा चुकी है। अंतिम कटौती दिसंबर 2025 में हुई थी, जब इसे 0.25 प्रतिशत घटाकर 5.25 प्रतिशत किया गया।


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