लखनऊ, 18 अप्रैल।
नवयुग कन्या महाविद्यालय में नारी शक्ति वंदन के अंतर्गत “सीता तत्व परिसंवाद” एवं रामायण शक्ति तत्व उत्सव के रूप में एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान, अयोध्या तथा संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य ने की।
कार्यक्रम का आयोजन मिशन शक्ति समिति तथा भारतीय भाषा संस्कृति और कला समिति और अहिल्याबाई होलकर समिति के संयुक्त प्रयास से किया गया, जिसमें विभिन्न विद्वानों और वक्ताओं ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
संगोष्ठी के दौरान मुख्य वक्ता शिल्पी सेन ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि रामकथा के केंद्र में राम आदर्श स्वरूप हैं, लेकिन रामायण के सभी पात्र अपनी-अपनी शक्तियों से राम के व्यक्तित्व को और अधिक प्रभावशाली बनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सीता के बिना राम मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में पूर्ण नहीं हो सकते।
उन्होंने आगे कहा कि रामायण की महिला पात्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और रामचरित मानस की शिक्षाओं को प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में अपनाना चाहिए।
इसी क्रम में एक अन्य विशिष्ट वक्ता ने कहा कि रामायण में राम और सीता केवल पात्र नहीं, बल्कि पुरुष और स्त्री तत्व के अनादि और गहन संयोग का प्रतीक हैं। सीता का चरित्र केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि नैतिक, सामाजिक और मानवीय मूल्यों का भी प्रतिनिधित्व करता है, जिससे नारी सम्मान और गरिमा का संदेश प्राप्त होता है।
वरिष्ठ साहित्यकार ने अपने विचार रखते हुए कहा कि सीता ने आत्मसम्मान से समझौता किए बिना धरती में समाना स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि सीता का चरित्र आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना प्राचीन काल में था। यह चरित्र धैर्य, नैतिकता, आत्मसम्मान और कर्तव्यनिष्ठा जैसे गुणों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है और एक संतुलित तथा आदर्श जीवन का मार्ग प्रशस्त करता है।










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