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14 May, 2026

भारत की 75% वेयरहाउसिंग मांग व आपूर्ति 13 बड़े क्लस्टरों में केंद्रित, रिपोर्ट में खुलासा

एक रिपोर्ट के अनुसार भारत की वेयरहाउसिंग और औद्योगिक मांग एवं आपूर्ति का बड़ा हिस्सा 13 प्रमुख क्लस्टरों में केंद्रित है, जो आने वाले वर्षों में भी देश के लॉजिस्टिक्स विकास को गति देंगे।

नई दिल्ली, 14 मई।

भारत के वेयरहाउसिंग और औद्योगिक क्षेत्र पर जारी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के कुल मांग और आपूर्ति का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा केवल 13 प्रमुख क्लस्टरों में केंद्रित है। रिपोर्ट के अनुसार आने वाले वर्षों में भी देश की ग्रेड ए औद्योगिक और वेयरहाउसिंग मांग एवं आपूर्ति का 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं उच्च-गतिविधि वाले क्लस्टरों में सीमित रहने की संभावना है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन क्लस्टरों की पहचान ऐसे माइक्रो मार्केट के रूप में की गई है, जहां 2021 के बाद से अब तक 40 लाख वर्गफुट से अधिक की कुल मांग और आपूर्ति दर्ज की गई है। वर्तमान में भारत का कुल ग्रेड ए वेयरहाउसिंग स्टॉक लगभग 300 मिलियन वर्गफुट तक पहुंच चुका है, जो 2021 के स्तर की तुलना में लगभग दोगुना है।

इस पूरे विकास में 13 प्रमुख क्लस्टरों की भूमिका सबसे अहम रही है, जो देशभर में चिन्हित 40 औद्योगिक और वेयरहाउसिंग क्लस्टरों की गतिविधियों का बड़ा हिस्सा संभालते हैं। इन क्लस्टरों ने 2021 के बाद से कुल मांग और नई आपूर्ति का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा योगदान दिया है और वर्तमान में इनके पास करीब 215 मिलियन वर्गफुट ग्रेड ए स्टॉक मौजूद है।

ये क्लस्टर देश के प्रमुख उपभोग और विनिर्माण केंद्रों में फैले हुए हैं, जिनमें चेन्नई के तीन, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु और पुणे के दो-दो, जबकि मुंबई, कोलकाता, अहमदाबाद और हैदराबाद का एक-एक क्लस्टर शामिल है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉजिस्टिक्स पार्क, औद्योगिक और फ्रेट कॉरिडोर तथा टेक्सटाइल, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिक व्हीकल पार्क जैसे सेक्टर-विशिष्ट विकास योजनाएं इस क्षेत्र में मांग को और गति देंगी।

मुंबई के भिवंडी को देश का सबसे बड़ा औद्योगिक और वेयरहाउसिंग क्लस्टर बताया गया है, जहां 42 मिलियन वर्गफुट ग्रेड ए स्टॉक मौजूद है। इसकी जेएनपीटी पोर्ट और मुंबई-अहमदाबाद तथा मुंबई-नासिक एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी ने इसे प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित किया है।

उत्तरी भारत में दिल्ली-एनसीआर के फरुख नगर और एनएच-48 क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी और औद्योगिक हब के नजदीक होने के कारण मांग में वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं दक्षिण भारत में चेन्नई के एनएच-16 और ओरागदम क्षेत्रों में बंदरगाह संपर्क और चेन्नई-बेंगलुरु एक्सप्रेसवे के चलते ऑटोमोबाइल, ई-कॉमर्स और थर्ड पार्टी लॉजिस्टिक्स सेक्टर से मांग बढ़ी है।

रिपोर्ट के अनुसार आने वाले समय में इन उच्च-गतिविधि क्लस्टरों में संस्थागत स्तर की संपत्तियों में वृद्धि जारी रहेगी और निवेशकों का रुझान नए उभरते बाजारों की ओर भी बढ़ेगा। साथ ही भोपाल, भुवनेश्वर, कोयंबटूर और जयपुर जैसे टियर-2 शहरों के भी ई-कॉमर्स और निर्यात आधारित उत्पादन के कारण लॉजिस्टिक्स हब के रूप में उभरने की संभावना जताई गई है।

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