नई दिल्ली, 09 मई।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने ओडिशा स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम मिसाइल परीक्षण केंद्र से अग्नि श्रेणी की मिसाइल का सफल परीक्षण कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। यह परीक्षण ऐसी उन्नत तकनीक के साथ किया गया, जिसमें मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेड री एंट्री व्हीकल प्रणाली का उपयोग किया गया है, जिससे एक ही मिसाइल से एक साथ कई अलग-अलग लक्ष्यों को भेदने की क्षमता प्राप्त होती है।
परीक्षण के दौरान मिसाइल ने अपने निर्धारित मार्ग पर पूरी सटीकता के साथ उड़ान भरी और हिंद महासागर क्षेत्र में स्थित कई लक्ष्यों को सफलतापूर्वक भेदा। सभी लक्ष्यों पर प्रभावी प्रहार निर्धारित समय और स्थान के अनुसार हुआ, जिससे परीक्षण की सफलता और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह तकनीक रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत अहम मानी जा रही है क्योंकि इससे एक ही हथियार प्रणाली के माध्यम से कई लक्ष्यों पर स्वतंत्र रूप से हमला किया जा सकता है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रणाली में मिसाइल अंतिम चरण में कई स्वतंत्र वारहेड में विभाजित हो जाती है और प्रत्येक वारहेड अलग-अलग लक्ष्य पर सटीक प्रहार करने में सक्षम होता है। इससे किसी भी सुरक्षा चुनौती की स्थिति में एक साथ कई ठिकानों को निशाना बनाने की क्षमता काफी बढ़ जाती है।
परीक्षण के दौरान पूरी प्रक्रिया पर वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने लगातार निगरानी रखी। सभी चरणों में मिसाइल ने अपेक्षित प्रदर्शन किया और निर्धारित उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस सफलता के बाद देश की मिसाइल तकनीक के और अधिक उन्नत स्तर पर पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे रक्षा क्षमताओं को नई मजबूती मिलेगी।
यह उपलब्धि न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, बल्कि इससे देश की रणनीतिक सुरक्षा संरचना भी और अधिक सुदृढ़ होने की संभावना है।





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