भोपाल, 16 मई।
बहू ट्विशा सिंह आत्महत्या मामले में रिटायर्ड जिला प्रधान न्यायाधीश एवं जिला उपभोक्ता फोरम बेंच-2 की पूर्व अध्यक्ष गिरिबाला सिंह को अदालत से जमानत मिलने के बाद मामला और अधिक तूल पकड़ गया है। जमानत के बाद मृतका के परिजनों ने नाराजगी जताते हुए चार दिन बीत जाने के बाद भी शव लेने से इनकार कर दिया है।
मामला बाग मुंगालिया एक्सटेंशन क्षेत्र का है, जहां मंगलवार रात ट्विशा सिंह ने घर की छत पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। ट्विशा, गिरिबाला सिंह के पुत्र समर्थ सिंह की पत्नी थी। घटना के बाद परिजनों ने दहेज हत्या का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी, जिसके बाद गुरुवार रात पुलिस ने एसीपी की जांच रिपोर्ट के आधार पर गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
इसी बीच भोपाल जिला अदालत ने गिरिबाला सिंह को जमानत दे दी, जबकि उनके पुत्र समर्थ सिंह की जमानत अर्जी पर सोमवार को सुनवाई होनी है। पुलिस के अनुसार समर्थ सिंह की तलाश जारी है और उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
परिजनों का आरोप है कि ट्विशा ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उसकी हत्या की गई है। उनका कहना है कि प्रभावशाली स्थिति के कारण मामले में कमजोर धाराओं का इस्तेमाल किया गया, जिससे आरोपियों को जमानत का लाभ मिल गया। परिजनों ने यह भी मांग की है कि पोस्टमार्टम एम्स दिल्ली में कराया जाए और जांच मध्यप्रदेश से बाहर किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपी जाए।
दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने अदालत में दायर जमानत याचिका में दहेज प्रताड़ना के आरोपों को निराधार बताया। कोर्ट में प्रस्तुत दस्तावेजों में यह दावा किया गया कि मृतका को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती थी और उसका मनोचिकित्सकीय उपचार भी चल रहा था। इन्हीं तथ्यों के आधार पर अदालत ने जमानत मंजूर की।










