पटना, 09 मई।
स्वतंत्रता के 80 वर्ष बाद भारत एक नए लोकतांत्रिक चरण में प्रवेश कर रहा है और लोकतंत्र की नई व्याख्या गढ़ रहा है। यह विचार पद्म भूषण से सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारत ने पश्चिमी लोकतांत्रिक मॉडल से स्वयं को अलग करते हुए एक स्वतंत्र और मौलिक लोकतांत्रिक पहचान विकसित की है, हालांकि इसके साथ कई सामाजिक चुनौतियों का समाधान भी आवश्यक है।
विश्व संवाद केंद्र द्वारा आयोजित आद्य पत्रकार देवर्षि नारद स्मृति कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के लोकतंत्र की विशिष्टता यह है कि यहां आपातकाल जैसी स्थिति के बाद भी लोकतांत्रिक व्यवस्था तेजी से बहाल हो गई, जो इसकी आंतरिक शक्ति को दर्शाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि स्वतंत्रता के बाद जब कांग्रेस ने लगातार तीन चुनावों में जीत हासिल की, तब पश्चिमी विशेषज्ञों ने यह अनुमान लगाया था कि भारत में लोकतंत्र लंबे समय तक टिक नहीं पाएगा, लेकिन यह धारणा गलत साबित हुई। उनके अनुसार भारत में लोकतंत्र किसी सैद्धांतिक मॉडल पर नहीं बल्कि सामान्य नागरिक के व्यवहार और भागीदारी पर आधारित है।
राम बहादुर राय ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान संबंधी भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में सामाजिक लोकतंत्र की शक्ति नागरिकों की ईमानदारी और लोकतांत्रिक कर्तव्य के प्रति उनकी निष्ठा में निहित है, भले ही राजनीतिक व्यवस्था में कुछ कमियां क्यों न हों।
आईआईटी पटना के निदेशक प्रोफेसर टी.एन. सिंह ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि यह विषय अत्यंत प्रासंगिक है क्योंकि कई बार लोकतंत्र में वास्तविकता और दिखाई देने वाली स्थिति में अंतर होता है। उन्होंने कहा कि भारत अनेक चुनौतियों के बावजूद एक परिपक्व लोकतंत्र की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो संतोषजनक है।
इस अवसर पर आयोजित पत्रकार सम्मान समारोह में वर्ष 2026 के लिए विभिन्न पत्रकारिता सम्मान प्रदान किए गए। देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद पत्रकारिता शिखर सम्मान वरिष्ठ पत्रकार लव कुमार मिश्र को दिया गया, वहीं उत्कृष्ट रिपोर्टिंग के लिए केशवराम भट्ट पत्रकारिता सम्मान सुबोध कुमार नंदन को तथा बाबूराव पटेल रचनाधर्मिता सम्मान छायाकार दीपक कुमार को प्रदान किया गया।
समारोह में पत्रकारिता से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद और बुद्धिजीवी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और कार्यक्रम में सम्मानित पत्रकारों के जीवन पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री भी प्रस्तुत की गई।



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