भोपाल, 25 मई ।
मध्य प्रदेश में अनूपपुर और दक्षिण शहडोल क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष का कारण बने नर हाथी ‘ई-5’ को वन विभाग ने सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर सुरक्षित रूप से बांधवगढ़ परिक्षेत्र भेज दिया है। इसके साथ ही प्रदेश सरकार ने हाथी हमलों में जान गंवाने वाले लोगों के आश्रितों को मिलने वाली मुआवजा राशि बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने का निर्णय लिया है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की पहल पर हाथियों के संरक्षण, सुरक्षा और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में कई दिनों से अनूपपुर और दक्षिण शहडोल वन क्षेत्रों में विचरण कर रहे नर हाथी ई-5 को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाया गया।
वन विभाग के अनुसार हाथी ई-5 की गतिविधियों के कारण हाल के दिनों में जनहानि, मवेशियों की क्षति और ग्रामीण इलाकों में मकानों को नुकसान पहुंचने की घटनाएं सामने आई थीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञों की निगरानी में दक्षिण शहडोल वन मंडल के केशवाही रेंज में व्यापक रेस्क्यू और ट्रांसलोकेशन ऑपरेशन शुरू किया गया।
उच्चस्तरीय रणनीति के तहत बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, दक्षिण शहडोल, उत्तर शहडोल और अनूपपुर वन मंडलों की संयुक्त टीमों ने अभियान को अंजाम दिया। रेस्क्यू से पहले लगातार जमीनी निगरानी, रात्रिकालीन गश्त, ड्रोन सर्विलांस और ग्रामीणों को सतर्क करने का काम किया गया। संवेदनशील गांवों में सार्वजनिक उद्घोषणा के जरिए अलर्ट जारी किए गए।
रणनीति के तहत प्रशिक्षित कुमकी हाथियों, महावतों, वन्यजीव चिकित्सकों और वन अमले की टीम को मौके पर तैनात किया गया। 20 मई को अंतिम रणनीति तैयार होने के बाद महावतों ने कुमकी हाथियों के साथ ई-5 से संपर्क स्थापित किया। इस दौरान हाथी ने शांत व्यवहार दिखाया, जिससे विशेषज्ञों को संकेत मिला कि वह अपने झुंड से अलग होकर तनावग्रस्त स्थिति में भटक रहा था।
22 मई की सुबह ट्रैंक्विलाइजेशन के साथ सक्रिय रेस्क्यू अभियान शुरू हुआ, लेकिन जीपीएस कॉलर लगाने और ट्रांसपोर्ट क्रेट में लोडिंग के दौरान हाथी ने प्रतिरोध किया, जिससे उपकरणों को आंशिक नुकसान पहुंचा। इसके बाद रणनीति में बदलाव कर अभियान को अस्थायी रूप से रोका गया और अगले दिन दोबारा शुरू किया गया।
23 मई को पशु चिकित्सकों की निगरानी में रेडियो कॉलरिंग, ट्रैंक्विलाइजेशन और सुरक्षित ट्रांसपोर्ट की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई। प्रशिक्षित हाथियों, क्रेन, जेसीबी मशीनों और मेडिकल टीमों के समन्वय से हाथी को सुरक्षित रूप से बांधवगढ़ भेजा गया। पूरे अभियान के दौरान किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
वन विभाग का कहना है कि दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र, घनी वनस्पति और हाथी के तनावपूर्ण व्यवहार जैसी चुनौतियों के बावजूद अभियान सफल रहा। प्रदेश में मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए राज्य स्तरीय हाथी टास्क फोर्स, रेडियो टैगिंग, ‘हाथी मित्र’ दल, ई-सर्विलेंस और ग्रामीण जागरूकता अभियान भी संचालित किए जा रहे हैं।




.jpg)


.jpg)


.jpg)




