भोपाल, 11 अप्रैल।
मध्य प्रदेश में आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग को लेकर बैतूल से शुरू हुई ‘आंगनवाड़ी न्याय पदयात्रा’ शनिवार सुबह राजधानी भोपाल पहुंचते ही पुलिस ने रोक दी।
छात्र नेता रामकुमार नागवंशी के नेतृत्व में करीब 200 किलोमीटर का सफर तय कर पहुंचे आंदोलनकारियों को बरकतुल्ला यूनिवर्सिटी के पास रोक दिया गया और उन्हें मुख्यमंत्री निवास की ओर आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई। बाद में उन्हें वहीं पास के क्षेत्र में बैठा दिया गया।
यह पदयात्रा एक अप्रैल को बैतूल जिले के अंबेडकर चौक से प्रारंभ हुई थी, जिसका उद्देश्य 11 दिनों में भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपना और आंगनवाड़ी तथा आशा कार्यकर्ताओं की समस्याओं को सीधे सरकार तक पहुंचाना था। इसे ‘आंगनवाड़ी न्याय पदयात्रा’ नाम दिया गया था।
आंदोलन के नेतृत्वकर्ता ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं देने वाली इन कार्यकर्ताओं को न तो पर्याप्त वेतन मिलता है और न ही उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा प्राप्त है। उन्होंने इसे उनके अधिकारों की शांतिपूर्ण लड़ाई बताया।
उन्होंने यह भी बताया कि उनके परिवार की महिलाएं भी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता रही हैं, जिनके संघर्ष को देखकर ही यह आंदोलन शुरू किया गया। उनका कहना है कि यह आंदोलन केवल उनका नहीं, बल्कि हजारों महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा है।
भोपाल पहुंचते ही पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पदयात्रा को आगे बढ़ने से रोक दिया, जिस पर आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें मुख्यमंत्री निवास तक जाने से रोका गया।
भीषण गर्मी के बावजूद यह पदयात्रा लगातार जारी रही और रास्ते में कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव जाकर लोगों से संवाद कर समर्थन जुटाया। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने वेतन और सुविधाओं में सुधार के साथ सरकारी दर्जा देने की मांग दोहराई।


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