तिरुवनंतपुरम, 04 मई।
केरल की राजनीतिक तस्वीर में महत्वपूर्ण बदलाव के संकेत देते हुए भारतीय जनता पार्टी ने लंबे अंतराल के बाद राज्य में वापसी करते हुए चथन्नूर विधानसभा सीट पर जीत हासिल की है। इस जीत के साथ पार्टी ने पांच साल का सूखा समाप्त किया। पूर्व कांग्रेस नेता बी.बी. गोपाकुमार ने सीपीआई के आर. राजेंद्रन को 4,002 मतों से पराजित किया।
यह परिणाम उस राज्य में भाजपा के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि माना जा रहा है, जहां अब तक माकपा नेतृत्व वाला एलडीएफ और कांग्रेस नेतृत्व वाला यूडीएफ ही प्रमुख राजनीतिक ताकत रहे हैं।
जीत के बाद बी.बी. गोपाकुमार ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित करते हुए कहा कि यह सफलता कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने कहा कि जैसे प्रधानमंत्री स्वयं को एक सामान्य कार्यकर्ता मानते हैं, वैसे ही वे भी जनता के बीच कार्यकर्ता के रूप में कार्य करते रहेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह जीत केवल आंकड़ों की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। चथन्नूर सीट पर भाजपा पिछले दो चुनावों में दूसरे स्थान पर रही थी, लेकिन इस बार पार्टी ने बेहतर रणनीति के साथ बढ़त हासिल की।
गोपाकुमार का कांग्रेस से भाजपा में शामिल होना भी इस जीत का अहम कारण माना जा रहा है, जिससे एंटी-इंकम्बेंसी वोट एकजुट हुए और यूडीएफ के पारंपरिक वोट बैंक में भी विभाजन देखने को मिला। इस मुकाबले में कांग्रेस नेता थोप्पिल रवि के पुत्र सूरज रवि तीसरे स्थान पर रहे, जिससे विपक्षी मतों का बिखराव स्पष्ट हुआ और भाजपा को सीधा लाभ मिला।
तिरुवनंतपुरम स्थित भाजपा मुख्यालय में परिणाम की पुष्टि होते ही उत्सव जैसा माहौल बन गया। वहीं नेमोम सीट पर भी मुकाबला रोचक बना रहा, जहां भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर लगभग 2,000 मतों की बढ़त के साथ आगे चल रहे थे।
नेमोम सीट का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि वर्ष 2016 में यहीं से भाजपा ने पहली बार केरल विधानसभा में खाता खोला था, जब ओ. राजगोपाल ने जीत दर्ज की थी। हालांकि वर्ष 2021 में पार्टी यह सीट गंवा बैठी थी।
कुल मिलाकर चथन्नूर की जीत और नेमोम में मजबूत प्रदर्शन यह संकेत देते हैं कि भाजपा केरल में नई रणनीति के साथ अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, हालांकि यह देखना शेष है कि यह बढ़त आगे कितनी स्थायी साबित होती है।





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