नई दिल्ली, 14 मई।
केंद्रीय लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि पिछले एक दशक में देश के पेंशन प्रशासन में व्यापक बदलाव देखने को मिला है और यह अब पारंपरिक प्रक्रिया से आगे बढ़कर तकनीक आधारित, जन-केंद्रित व्यवस्था बन चुका है, जो पेंशनभोगियों की गरिमा, पारदर्शिता और जीवन को आसान बनाने पर केंद्रित है।
विज्ञान भवन में आयोजित 16वीं अखिल भारतीय पेंशन अदालत को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पेंशनभोगियों को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले व्यक्तियों के रूप में देखा जाना चाहिए, जिनका अनुभव और संस्थागत स्मृति देश की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार लगातार सरल, संवेदनशील और जवाबदेह पेंशन व्यवस्था को मजबूत करने में जुटी है।
डॉ. सिंह ने पेंशन अदालत प्रणाली की विशेषता बताते हुए कहा कि यह ऐसा मंच है जहां सभी पक्ष एक साथ बैठकर अधिकांश मामलों का समाधान मौके पर ही कर लेते हैं, जिससे लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया और फाइलों की जटिलता से राहत मिलती है।
उन्होंने वर्ष 2014 के बाद हुए सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले पेंशन विभाग अपेक्षाकृत सीमित दायरे में काम करता था, लेकिन अब यह डिजिटल सुधारों और नागरिक-केंद्रित नीतियों के चलते सरकार के सबसे सक्रिय विभागों में शामिल हो गया है।
उन्होंने बायोमेट्रिक सत्यापन और डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र प्रणाली का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे पेंशन प्रक्रिया सरल हुई है और वृद्ध पेंशनभोगियों की कठिनाइयाँ काफी कम हुई हैं। अब तक एक करोड़ से अधिक लाभार्थी इस डिजिटल व्यवस्था से लाभान्वित हो चुके हैं, जिससे भुगतान प्रणाली अधिक पारदर्शी और बाधारहित बनी है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि पेंशन सुधारों के तहत पारिवारिक पेंशन नियमों का सरलीकरण, गुमशुदा व्यक्तियों से जुड़े पुराने प्रावधानों में बदलाव, तलाकशुदा और अलग रह रही बेटियों से जुड़े नियमों में राहत तथा दिव्यांग आश्रितों के लिए लाभकारी सुधार किए गए हैं, जो वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर लागू किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि 2017 से शुरू हुई पेंशन अदालतों की श्रृंखला में अब तक 15 अदालतें आयोजित हो चुकी हैं, जिनमें 27,812 मामलों की सुनवाई हुई और इनमें से 19,948 मामलों का समाधान मौके पर ही कर दिया गया, जबकि शेष मामलों का निपटारा बाद में अंतर-मंत्रालयी समन्वय से किया गया।
16वीं पेंशन अदालत में 37 मंत्रालयों से जुड़ी 985 लंबित शिकायतों पर सुनवाई की गई, जो 15 अप्रैल, 2026 तक 45 दिनों से अधिक समय से लंबित थीं, जिनमें से अब तक 728 मामलों का समाधान किया जा चुका है।
कार्यवाही के दौरान 16 मंत्रालयों से जुड़े 26 महत्वपूर्ण मामलों को प्रस्तुत किया गया, जिनमें रक्षा मंत्रालय के 12, गृह मंत्रालय के 8 और रेल मंत्रालय के 2 मामले शामिल थे, जबकि शेष मामले अन्य विभागों से संबंधित थे।
इस अवसर पर आठ पेंशनभोगी और पारिवारिक पेंशनभोगी प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहे, जिनमें महाराष्ट्र और उत्तराखंड से आए लाभार्थी शामिल थे, वहीं 18 अन्य पेंशनभोगी देश के विभिन्न राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े, जिससे इस पहल की व्यापकता स्पष्ट हुई।
पेंशन अदालत तंत्र के तहत निपटाए गए मामलों में एक में 74 लाख रुपये से अधिक के लाभ जारी किए गए, जबकि दो अन्य मामलों में लगभग 46 लाख रुपये के भुगतान किए गए।
इस पूरी कार्यवाही में पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधि, बैंक, पेंशनभोगी संगठन और अन्य हितधारक भी शामिल रहे।




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