नई दिल्ली, 14 मई।
क्वांटम भौतिकी के क्षेत्र में एक नई खोज सामने आई है, जिसमें वैज्ञानिकों ने पाया है कि विपरीत क्वांटम अवस्थाओं में तैयार कण कई स्थितियों में समान अवस्थाओं वाले कणों की तुलना में अधिक जानकारी प्रदान कर सकते हैं। इस अध्ययन से क्वांटम कंप्यूटिंग, क्रिप्टोग्राफी और मापन तकनीकों में नई संभावनाओं के द्वार खुल गए हैं।
यह शोध पत्रिका फिजिकल रिव्यू लेटर्स में प्रकाशित हुआ है, जिसमें कहा गया है कि इस खोज से अज्ञात क्वांटम उपकरणों की पहचान और विश्लेषण को बेहतर बनाया जा सकता है तथा भविष्य की क्वांटम एन्क्रिप्शन तकनीकों को अधिक सुरक्षित किया जा सकता है।
अध्ययन का केंद्र क्वांटम बिट्स यानी क्यूबिट्स हैं, जो क्वांटम सूचना की मूल इकाइयां माने जाते हैं, और इनके स्पिन गुणों को एक साथ मापने की संभावनाओं पर शोध किया गया है।
वैज्ञानिकों ने क्यूबिट्स के दो प्रकार के संयोजनों का अध्ययन किया, जिसमें एक स्थिति में दोनों स्पिन एक ही दिशा में होते हैं, जिसे समानांतर अवस्था कहा जाता है, जबकि दूसरी स्थिति में स्पिन विपरीत दिशा में होते हैं, जिसे प्रतिकूलांतर अवस्था कहा जाता है।
परंपरागत समझ के विपरीत, शोध में पाया गया कि कुछ विशेष क्वांटम मापों में प्रतिकूलांतर अवस्थाएं अधिक लाभकारी होती हैं। अध्ययन के अनुसार, इन अवस्थाओं में तीन परस्पर असंगत स्पिन घटकों को एक साथ सटीक रूप से अनुमानित किया जा सकता है, जो समानांतर अवस्थाओं में संभव नहीं है।
यह शोध एस. एन. बोस राष्ट्रीय केंद्र, बालागरह बीजेके महाविद्यालय और भारतीय सांख्यिकी संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है।
अध्ययन क्वांटम यांत्रिकी के उन सिद्धांतों को चुनौती देता है, जिनमें यह माना जाता है कि किसी क्वांटम अवस्था की समान प्रतियां अधिक उपयोगी होती हैं।
यह शोध बोहर के पूरकता सिद्धांत और हाइजेनबर्ग अनिश्चितता सिद्धांत जैसे मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित है, जिनके अनुसार क्वांटम प्रणालियों के कुछ गुणों को एक साथ पूर्ण सटीकता से मापा नहीं जा सकता।
वैज्ञानिकों ने इसे याकिर आहरोनोव द्वारा प्रस्तावित प्रसिद्ध ‘मीन किंग्स प्रॉब्लम’ से भी जोड़ा है।
शोधकर्ताओं के अनुसार इस खोज का व्यावहारिक उपयोग क्वांटम तकनीकों के परीक्षण, क्वांटम उपकरणों की दक्षता बढ़ाने और क्वांटम संचार प्रणालियों को अधिक प्रभावी बनाने में किया जा सकता है।
अध्ययन यह भी दर्शाता है कि क्वांटम भौतिकी में समरूपता के बजाय असमानता या विरोधाभास कई बार नई क्षमताओं को उजागर कर सकता है।











