राष्ट्रीय जूट बोर्ड ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के सहयोग से विकसित जूट क्रॉप इंफॉर्मेशन सिस्टम के विस्तार को तेज कर दिया है, जिसका उद्देश्य जूट क्षेत्र में फसल निगरानी और उत्पादन आकलन को अधिक सटीक और तकनीक आधारित बनाना है।
सूत्रों के अनुसार यह प्रणाली उपग्रह चित्रण, मौसम विश्लेषण, वनस्पति सूचकांक और खेत स्तर के आंकड़ों को एकीकृत कर जूट की खेती और उत्पादन प्रवृत्तियों की लगभग वास्तविक समय में निगरानी सुनिश्चित करती है।
वर्ष 2023 से लागू इस परियोजना के तहत दो डिजिटल उपकरण शामिल किए गए हैं, जिनमें फील्ड मॉनिटरिंग के लिए मोबाइल आधारित “भुवन जंप” और विश्लेषणात्मक मूल्यांकन के लिए वेब आधारित “पटसन” प्लेटफॉर्म शामिल है।
इस प्रणाली के लागू होने से पहले जूट उत्पादन और क्षेत्रफल का आकलन मुख्य रूप से बिखरी हुई फील्ड रिपोर्टों और मैनुअल डाटा संग्रह पर आधारित था, जिससे कई बार देरी और असंगतियां सामने आती थीं। साथ ही उपग्रह, मौसम और जमीन स्तर के आंकड़ों के बीच समन्वय की कमी से बाढ़, सूखा और कीट प्रकोप जैसी स्थितियों में निर्णय प्रक्रिया प्रभावित होती थी।
नई व्यवस्था के तहत अब कई स्रोतों के डेटा को एक ही मंच पर जोड़कर अधिक व्यवस्थित और प्रमाण आधारित निगरानी प्रणाली विकसित की गई है। इसके माध्यम से स्वचालित रिपोर्टिंग, वास्तविक समय के करीब फसल अनुमान और मौसम आधारित चेतावनी प्रणाली को मजबूती मिली है।
राष्ट्रीय जूट बोर्ड के क्षेत्रीय नेटवर्क के जरिए “भुवन जंप” ऐप के माध्यम से बड़े पैमाने पर भू-संदर्भित आंकड़े एकत्र किए जा रहे हैं। इसके साथ ही फसल कटाई प्रयोगों में भी उपग्रह आधारित स्मार्ट सैंपलिंग तकनीक का उपयोग कर उत्पादन अनुमान को अधिक सटीक बनाया जा रहा है।
मंत्रालय के अनुसार इस प्रणाली के परिणाम अब नीति निर्माण और क्षेत्रीय योजना प्रक्रियाओं में उपयोग किए जा रहे हैं, जिससे राज्य और केंद्र स्तर के आंकड़ों में समन्वय बेहतर हुआ है और जूट उत्पादन क्षेत्रों में लक्षित हस्तक्षेप संभव हुआ है।
इसके अलावा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फसल क्षति के आकलन के लिए उपग्रह डेटा आधारित मॉडल भी विकसित किए गए हैं। मौसम विश्लेषण के जरिए जिलास्तरीय चेतावनी प्रणाली को भी मजबूती दी गई है, जिससे वर्षा, सूखा और तापमान में बदलाव की पूर्व सूचना मिल रही है।
आगे की योजना के तहत इस प्रणाली का विस्तार अधिक जूट उत्पादक जिलों तक किया जाएगा, साथ ही किसानों के लिए मोबाइल और संदेश आधारित सलाह प्रणाली को मजबूत किया जाएगा तथा जल संसाधन और कार्बन आकलन जैसे क्षेत्रों में भी इसका उपयोग बढ़ाया जाएगा।






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