रोम, 23 अप्रैल।
भीषण गर्मी वैश्विक कृषि प्रणालियों को संकट में डाल रही है, जिससे खाद्य तंत्र में विघटन हो रहा है। इस प्रभाव के चलते 100 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका और स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अत्यधिक गर्मी अब केवल मौसम ही नहीं, बल्कि खेती, मछली पालन और वानिकी के लिए भी एक अस्तित्वगत संकट बन चुकी है। एफएओ के जलवायु परिवर्तन कार्यालय के प्रमुख कावेह जाहेदी ने बताया कि भीषण गर्मी यह तय कर रही है कि किसान और मछुआरे क्या उगा सकते हैं और कब काम कर सकते हैं।
समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र भी इस गर्मी से प्रभावित हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में दुनिया के 91 प्रतिशत महासागरों ने कम से कम एक समुद्री लू का सामना किया। इससे पानी में ऑक्सीजन का स्तर घट रहा है, जिससे मछलियों का अस्तित्व खतरे में है और समुद्री खाद्य प्रणालियां भी कमजोर हो रही हैं।
प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों की आवश्यकता
रिपोर्ट में बताया गया कि किसानों को मौसम का सटीक डेटा समय पर मिलना चाहिए ताकि वे बुवाई और कटाई के समय में बदलाव कर सकें। अगर तापमान 1.5 डिग्री के बजाय 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ता है, तो भीषण गर्मी की तीव्रता और आवृत्ति चार गुना तक बढ़ सकती है।










.jpg)
