नई दिल्ली, 08 अप्रैल 2026।
असम में चुनाव प्रचार के अंतिम दिन एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नाम पर फर्जी पत्र जारी होने का मामला सामने आया है। इसे संघ प्रमुख द्वारा प्रधानमंत्री को लिखा गया बताया जा रहा है। इस पत्र को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के संघ और भाजपा पर किए गए विवादास्पद और अपमानजनक टिप्पणियों के बाद कांग्रेस की सोशल मीडिया टीम से जोड़कर देखा जा रहा है।
राजीव तुली, रा.स्व. संघ के प्रचार विभाग के पूर्व पदाधिकारी और सुरूचि प्रकाशन के अध्यक्ष ने कहा कि फर्जी पत्र की भाषा और शैली इतनी घटिया है कि संघ के स्वयंसेवक तो दूर, सामान्य समझ रखने वाला कोई भी व्यक्ति इसे स्वीकार नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी राजनीति में संघ पर अनावश्यक हमला करना कांग्रेस की घटिया राजनीति को उजागर करता है।
पत्र में संघ की नाराजगी दिखाने के लिए प्रधानमंत्री को कथित रूप से यह लिखा गया कि असम भाजपा में जो हालात हैं और मुख्यमंत्री पर जो आरोप लग रहे हैं, उन्हें गंभीरता से देखा जाना चाहिए। इसमें प्रधानमंत्री को चेतावनी और सलाह देने की शैली दिखाई गई है।
राजीव तुली ने इसे हास्यास्पद और असफल प्रयास करार देते हुए कहा कि कांग्रेस या किसी अन्य राजनीतिक दल ने संघ और उसके स्वयंसेवकों की कार्यशैली को समझे बिना यह फर्जी पत्र जारी किया है। उन्होंने बताया कि संघ अपने संगठनों को कभी निर्देशित नहीं करता, बल्कि सभी वरिष्ठ पदाधिकारी समय-समय पर समन्वय बैठकों में मिलकर आपसी चर्चा से निर्णय लेते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस का यह स्तरहीन प्रयास चुनावी हार और अपनी असफलता को छिपाने का तरीका है। असम में कांग्रेस अध्यक्ष की संघ पर टिप्पणियां देश के विरुद्ध और गृहयुद्ध जैसी मानसिकता को दर्शाती हैं। उन्होंने मुस्लिम वोट पाने के लिए संघ का नाम इस्तेमाल करते हुए भय पैदा करने की कोशिश की और संघ की तुलना सांप से की।
राजीव तुली ने जोर देकर कहा कि संघ हमेशा समाज में संवाद और सहभागिता के माध्यम से काम करता है। संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने सार्वजनिक मंचों पर बार-बार स्पष्ट किया है कि हिन्दू और मुसलमान समुदाय का मूल डीएनए समान है, केवल पूजा-पद्धति और वेश-भूषा में अंतर है। संघ मुस्लिम नेतृत्व के साथ स्वस्थ संवाद बनाए रखता है और राष्ट्रहित में समाज को सही दिशा में चलाने का आह्वान करता है।




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