बेरूत, 08 अप्रैल।
मिडिल ईस्ट में 40 दिन बाद शांति का वातावरण आया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 48 घंटे की डेडलाइन खत्म होने से पहले दो हफ्ते के लिए संघर्ष विराम की घोषणा की। भारत ने जहां इस संघर्ष विराम का स्वागत किया और कूटनीति व संवाद की जरूरत पर जोर दिया, वहीं अन्य देशों की प्रतिक्रियाएँ मिश्रित रही।
रूस और स्पेन ने इस समझौते पर तंज कसा, जबकि जर्मनी, फ्रांस, यूक्रेन और ब्रिटेन ने इसे सकारात्मक कदम बताया। खाड़ी देश भी राहत महसूस कर रहे हैं।
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि अमेरिका-इजरायल की रणनीति विफल रही और 28 फरवरी को ईरान पर किए गए “एकतरफा हमले” में दोनों देशों को हार का सामना करना पड़ा।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसे क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में सकारात्मक कदम बताया, लेकिन चेतावनी दी कि लेबनान की स्थिति गंभीर है और उसे भी संघर्ष विराम में शामिल किया जाना चाहिए।
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि कूटनीतिक प्रयासों से स्थायी समाधान लाना जरूरी है। यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने संघर्ष विराम और होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने का स्वागत किया और अमेरिका से अनुरोध किया कि वह रूस को भी युद्ध रोकने के लिए प्रेरित करे।
स्पेन ने ईरान में संघर्ष विराम को स्वीकार किया, लेकिन लेबनान में इजरायली हमलों की आलोचना की। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने इसे अच्छी खबर कहा, लेकिन आग फैलाने वालों की सराहना नहीं की। उन्होंने शांति, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय वैधता पर जोर दिया।
यूके के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कहा कि यह संघर्ष विराम क्षेत्र और वैश्विक स्तर पर राहत का पल लाएगा।


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