तेहरान, 08 अप्रैल।
ईरान में अमेरिका के साथ हुए संघर्ष विराम की घोषणा को लेकर वैश्विक स्तर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसका ऐलान किया। ईरान ने दो सप्ताह के अस्थायी समझौते का समर्थन किया। भारत में ईरानी सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने बताया कि ईरान ने कभी भी यह संघर्ष नहीं चाहा और न्यूक्लियर हथियारों का समर्थन नहीं किया।
इलाही का कहना है कि अमेरिका को इस संघर्ष विराम के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने बताया कि अमेरिकी पक्ष पिछले 41 दिनों में युद्ध को रोकना चाहता था, लेकिन असफल रहा। उन्होंने कहा कि ईरान पर यह युद्ध थोप दिया गया था और इससे क्षेत्र और वैश्विक स्तर पर कई देशों को नुकसान हुआ।
जब स्थायी समाधान के सवाल पर पूछा गया, तो इलाही ने कहा कि अगर अमेरिकी शर्तें मान लें तो यह संघर्ष समाप्त हो सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं चाहता और इसका निर्णय धर्म और नीति दोनों के अनुरूप है।
इलाही ने अमेरिका की भूमिका पर कहा कि अमेरिका ने इस क्षेत्र में दूर से हस्तक्षेप किया, जिससे झगड़े और संकट पैदा हुए। उन्होंने चेताया कि खाड़ी में किसी भी संघर्ष से पूरी दुनिया को नुकसान होगा और अब क्षेत्रीय देशों को साथ मिलकर ऐसी घटनाओं को रोकना चाहिए।







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