नई दिल्ली, 08 अप्रैल 2026।
भारत सरकार के कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और शिक्षा राज्य मंत्री श्री जयन्त चौधरी ने पूरे देश के युवाओं के लिए आजीविका के नए अवसर खोलने हेतु स्किल्स आउटकम्स फंड बनाने की महत्वाकांक्षी पहल की शुरुआत की है। यह पहल कम आय वाले पृष्ठभूमि वाले युवाओं के लिए स्थायी और आकांक्षात्मक रोज़गार के अवसर सुनिश्चित करने के लिए आउटकम-बेस्ड फाइनेंसिंग (ओबीएफ़) को बढ़ावा देने की दिशा में पहला कदम है।
इस फंड का उद्देश्य पब्लिक और प्राइवेट निवेश को सीधे वेरिफाइड रोजगार परिणामों से जोड़कर भारत के स्किलिंग इकोसिस्टम को सुदृढ़ करना है। स्किल्स आउटकम्स फंड राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के तत्वावधान में गैर-लाभकारी और परोपकारी संगठनों के साथ साझेदारी में संचालित होगा। यह मॉडल सरकारी और निजी फंडिंग को मिलाकर युवाओं के लिए वास्तविक रोज़गार अवसर बढ़ाने की रणनीति पेश करता है।
श्री जयन्त चौधरी ने फंडर राउंडटेबल में कहा कि भारत की स्किलिंग यात्रा अब परिणाम-केंद्रित हो गई है और यह पहल युवाओं के कौशल को सम्मानजनक और निरंतर रोजगार में बदलने का संकल्प दिखाती है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार, उद्योग और परोपकारी भागीदारों को मापनीय परिणामों के चारों ओर एक साथ लाकर एक ऐसा मॉडल तैयार कर रही है, जो बड़े पैमाने पर प्रभाव डाल सके।
कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय की सीनियर इकोनॉमिक एडवाइजर मनीषा सेनसर्मा ने बताया कि आउटकम-बेस्ड फाइनेंसिंग अकाउंटेबिलिटी को मजबूत करती है और यह सुनिश्चित करती है कि निवेश सीधे रोजगार परिणामों से जुड़े हों। यह भारत की स्किलिंग और ह्यूमन कैपिटल रणनीति में एक महत्वपूर्ण कदम है।
राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के सीईओ अरुणकुमार पिल्लई ने कहा कि स्किल इम्पैक्ट बॉन्ड के अनुभव से साबित हुआ है कि परिणाम-आधारित इंसेंटिव्स से पूरे स्किलिंग इकोसिस्टम का फोकस वास्तविक रोजगार पर होता है। स्किल्स आउटकम्स फंड इस दिशा में अगला कदम है, जो युवाओं के लिए दीर्घकालिक रोज़गार सुनिश्चित करेगा।
ब्रिटिश एशियन ट्रस्ट और द ब्लेंडेड फाइनेंस कंपनी द्वारा आयोजित राउंडटेबल में भारत में आउटकम्स-बेस्ड फाइनेंसिंग के कार्यान्वयन और लंबे समय तक रोजगार परिणाम सुनिश्चित करने पर गहन चर्चा हुई। इस दौरान पब्लिक पॉलिसी, प्राइवेट निवेश और वेरिफिकेशन सिस्टम को एक साथ लाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
यह पहल पारंपरिक ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन के तरीकों से आगे बढ़कर जॉब प्लेसमेंट, रिटेंशन और करियर प्रगति सहित मापने योग्य और वेरिफाइड रोजगार परिणामों पर केंद्रित है। स्किल्स आउटकम्स फंड भारत के स्किलिंग इकोसिस्टम में बड़े पैमाने पर ओबीएफ़ को लागू करने का अगला चरण है।
इस राउंडटेबल में समाज-सेवी, कॉर्पोरेट और डेवलपमेंट इकोसिस्टम के प्रमुख भागीदार शामिल हुए, जिनमें गैल, एचयूआरएल, सीआईएफएफ, माइकल एंड सुसान डेल फाउंडेशन, जेपी मॉर्गन फाउंडेशन, गेट्स फाउंडेशन, ईवाई फाउंडेशन, जेएसडब्ल्यू फाउंडेशन, बजाज फिनसर्व, एनएसई फाउंडेशन, नवीन जिंदल फाउंडेशन, जीएमआर वरलक्ष्मी फाउंडेशन, हिन्दुस्तान यूनीलीवर लिमिटेड, ब्रिज आउटकम फाउंडेशन और जीआईजेड जैसे संगठन थे। उनकी भागीदारी से यह स्पष्ट होता है कि आउटकम-बेस्ड फाइनेंसिंग अब क्रॉस-सेक्टर सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण टूल बन चुका है।
श्री जयन्त चौधरी की इस पहल के माध्यम से न सिर्फ़ एक नया फाइनेंसिंग मॉडल सामने आया है, बल्कि यह स्किलिंग और रोजगार में परिणाम-आधारित निवेश को जोड़ने की दिशा में एक व्यापक और स्थायी बदलाव का प्रतीक भी है। इस मॉडल के जरिए लाखों युवाओं के लिए आजीविका के अवसर बढ़ेंगे और भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता को मज़बूती मिलेगी।








.jpg)
.jpg)
.jpg)
.jpg)