08 अप्रैल 2026।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले बुधवार सुबह तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात की। चार सदस्यीय इस प्रतिनिधि मंडल में डेरेक ओब्रायन, मेनका गुरुस्वामी, साकेत गोखले और सागरिका घोष शामिल थे। बैठक का मुख्य उद्देश्य एसआईआर और अन्य चुनावी मुद्दों पर चर्चा करना था, लेकिन चर्चा के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में डेरेक ओब्रायन ने चुनाव आयुक्तों पर चिल्लाकर उनकी बात करने की क्षमता को बाधित किया। इस पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनसे आयोग कक्ष की गरिमा बनाए रखने का अनुरोध करते हुए कहा कि चिल्लाना और अनुचित व्यवहार उचित नहीं है।
चुनाव आयोग ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर अपने पोस्ट में स्पष्ट किया कि इस बार पश्चिम बंगाल में चुनाव पूरी तरह भय, हिंसा, धमकी, प्रलोभन, छापा, बूथ एवं सोर्स जामिंग से मुक्त रहेंगे और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या दबाव को सहन नहीं किया जाएगा।
इसके बाद डेरेक ओब्रायन ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि उन्हें और उनके प्रतिनिधि मंडल को मीटिंग रूम से बाहर निकलने के लिए कहा गया। उन्होंने बताया कि मुलाकात केवल सात मिनट चली और मुख्य चुनाव आयुक्त ने उन्हें ‘गेट लास्ट’ कहकर बाहर जाने के लिए कहा। उन्होंने इसे तृणमूल कांग्रेस के प्रति अनुचित व्यवहार बताया।
हालांकि, पार्टी की राज्यसभा उपनेता सागरिका घोष ने चुनाव आयोग के इस बयान को पूरी तरह गलत करार देते हुए कहा कि मुलाकात के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ने केवल दो बातें कहीं – पहला, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता कौन है और दूसरा ‘गेट लॉस्ट’ शब्द। उन्होंने आयोग के बयान को झूठ बताया।




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