नई दिल्ली, 13 मई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन बचत को लेकर की गई अपील के बाद बुधवार को उन्होंने स्वयं सीमित सुरक्षा वाहनों के साथ यात्रा कर एक उदाहरण प्रस्तुत किया। सामान्य परिस्थितियों में प्रधानमंत्री के काफिले में बारह से पंद्रह वाहन शामिल रहते हैं, लेकिन इस बार वे केवल दो गाड़ियों के साथ नजर आए, जिससे प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
इनमें एक वाहन में प्रधानमंत्री मौजूद थे, जबकि दूसरे वाहन में विशेष सुरक्षा समूह के सुरक्षा कर्मी तैनात रहे। प्रधानमंत्री पिछले कुछ दिनों से लगातार नागरिकों से पेट्रोल और डीजल के विवेकपूर्ण उपयोग की अपील कर रहे हैं तथा सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देने और अनावश्यक ईंधन खपत कम करने का आग्रह भी कर रहे हैं।
इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी अपने-अपने काफिलों में वाहनों की संख्या घटाने की पहल की है।
प्रधानमंत्री की इस पहल का असर राज्यों में भी देखने को मिल रहा है, जहां प्रशासनिक स्तर पर काफिलों में वाहनों की संख्या सीमित करने के कदम उठाए जा रहे हैं। राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने काफिले में वाहनों की संख्या घटाने के निर्देश दिए हैं, जहां पहले चौदह से सोलह वाहन शामिल होते थे, वहीं हालिया दौरे में केवल पांच वाहन ही दिखाई दिए। इसे ऊर्जा संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
मध्य प्रदेश में भी मंत्रियों और विशिष्ट व्यक्तियों के काफिलों को सीमित करने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के काफिले में पहले तेरह वाहन शामिल रहते थे, लेकिन नए निर्देशों के बाद भोपाल में स्थानीय भ्रमण के दौरान यह संख्या घटाकर आठ कर दी जाएगी।










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