हरिद्वार, 22 अप्रैल।
हरिद्वार में सेवा भारती का वार्षिकोत्सव ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज के सभागार में बुधवार को भव्य रूप से सम्पन्न हुआ, जिसमें संगठन की गतिविधियों और सेवा कार्यों पर विस्तृत चर्चा के साथ कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन से हुई।
कार्यक्रम का शुभारंभ सेवा बस्ती के बच्चों द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत से हुआ, जिसके बाद मुख्य वक्ता ने संघ के शताब्दी वर्ष और सेवा कार्यों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सेवा भारती केवल संगठन नहीं बल्कि भारतीय सनातन मूल्यों की सजीव अभिव्यक्ति है। उन्होंने बताया कि “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की भावना के आधार पर 1925 में संघ की नींव रखी गई थी, जो आज विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुकी है।
उन्होंने आगे कहा कि सेवा का वास्तविक अर्थ केवल सहायता देना नहीं बल्कि समाज को आत्मनिर्भर बनाना है, और संस्कार केंद्रों में पढ़ने वाले बच्चे भविष्य में समाज का नेतृत्व करेंगे। सेवा और समरसता के माध्यम से संगठन की मजबूती का मार्ग प्रशस्त होता है।
कार्यक्रम में संघ शताब्दी वर्ष के अंतर्गत पंच परिवर्तन के सूत्रों—सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, स्व का बोध तथा नागरिक कर्तव्य—पर विस्तार से चर्चा की गई और सेवा कार्यकर्ताओं से इन्हें जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया गया।
जिला मंत्री द्वारा प्रस्तुत वार्षिक प्रतिवेदन में बताया गया कि जिले की 34 सेवा बस्तियों में 38 प्रकल्प संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें संस्कार केंद्र, प्रशिक्षण केंद्र, सामाजिक कार्य, चलित चिकित्सालय, योग और आत्मरक्षा प्रशिक्षण शामिल हैं। पिछले वर्ष हजारों बच्चों, महिलाओं और मरीजों को विभिन्न सेवाओं का लाभ दिया गया, साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भी राहत सामग्री वितरित की गई।
कार्यक्रम में बच्चों ने योग और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया, जबकि संचालन अनमोल गर्ग ने किया। इस अवसर पर कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।






.jpg)



