उत्तराखंड
22 Apr, 2026

बाबा केदारनाथ धाम के कपाट खुले, चारधाम यात्रा का शुभारंभ

केदारनाथ धाम के कपाट वैदिक विधि-विधान के साथ खुलते ही चारधाम यात्रा का शुभारंभ हुआ, इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे तथा प्रशासन की ओर से यात्रा को सुरक्षित और सुचारु रूप से संचालित करने के लिए व्यापक प्रबंध किए गए।

देहरादून, 22 अप्रैल।

देहरादून में आज करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र बाबा केदारनाथ धाम के कपाट वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक धार्मिक विधियों के बीच विधिवत रूप से खोल दिए गए। इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से प्रथम पूजा संपन्न की। कपाट खुलने के पश्चात मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की बाबा केदार के प्रति गहरी श्रद्धा है, जिसके चलते उत्तराखंड के चारधाम स्थलों का तेज गति से विकास हो रहा है। उन्होंने शुभकामनाएं देते हुए देश-विदेश के श्रद्धालुओं को चारधाम यात्रा के लिए आमंत्रित किया।

कपाट खुलने के ऐतिहासिक अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु धाम पहुंचे और सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी थी। कपाट खुलते ही उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित चारधाम यात्रा का शुभारंभ हो गया, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन की ओर से यात्रा को सुरक्षित और सुचारु रूप से संचालित करने के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं।

इस अवसर पर पूरा धाम भक्ति और आस्था के रंग में रंग गया, जहां आठवीं सिखलाई रेजीमेंट के सैन्य बैंड की मधुर धुनों और डमरू वाद्य यंत्रों की गूंज से वातावरण शिवमय हो उठा। इस पावन अवसर पर मंदिर समिति के पदाधिकारी, तीर्थ पुरोहित, प्रशासनिक अधिकारी एवं अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे और कपाट खुलने के साक्षी बने।

केदारनाथ धाम को द्वादश ज्योतिर्लिंगों में ग्यारहवां ज्योतिर्लिंग माना जाता है और यहां ग्रीष्मकाल में छह माह तक भगवान केदारनाथ की पूजा-अर्चना होती है, जबकि शीतकाल में बर्फबारी के कारण कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-अर्चना ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में संपन्न होती है। यह धाम चारधाम और पंचकेदार में प्रथम केदार के रूप में प्रसिद्ध है।

मान्यता के अनुसार यह पवित्र धाम द्वापर युग से जुड़ा है, जहां पांडवों ने गौत्र हत्या के पाप से मुक्ति के लिए भगवान शिव के दर्शन किए थे। भगवान शिव ने उन्हें महिष रूप में दर्शन दिए थे, जिसके बाद पांडवों ने इसी स्थान पर केदारनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना की। मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंग त्रिकोणीय स्वरूप में विराजमान है, जिसे सतयुग का माना जाता है और कहा जाता है कि यहां नर-नारायण ने भी तपस्या की थी।

केदारपुरी के रक्षक के रूप में भुकुंट भैरव की विशेष मान्यता है, जिन्हें क्षेत्र की रक्षा का दायित्व प्राप्त है। मान्यता है कि शीतकाल में जब पूरा क्षेत्र बर्फ से ढक जाता है, तब भी भैरव देवता यहां विराजमान रहते हैं और धाम की सुरक्षा करते हैं। कपाट खुलने के बाद श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन से पूर्व या पश्चात भैरव मंदिर में दर्शन अवश्य करते हैं, क्योंकि उनकी पूजा के बिना यात्रा को पूर्ण नहीं माना जाता।

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