मुंबई, 25 मई।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देश की आर्थिक स्थिति पर व्यापक चर्चा की। उन्होंने वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईंधन, उर्वरक और विदेशी मुद्रा प्रबंधन पर विशेष ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने आश्वस्त किया कि वर्तमान चुनौतियों के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था सुदृढ़ बनी हुई है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बात पर जोर दिया कि भारत का आर्थिक विकास पथ निरंतर बना हुआ है और देश विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने औद्योगिक मांग और आर्थिक गतिविधियों के सकारात्मक संकेतों का उल्लेख करते हुए निराशावादी दृष्टिकोण से बचने की सलाह दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की आर्थिक चुनौतियां मुख्यतः बाहरी हैं, जो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि, उर्वरकों के बढ़ते मूल्य और सोने के आयात के कारण विदेशी मुद्रा की आवश्यकताओं से संबंधित हैं।

महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों पर चर्चा करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती से राजस्व पर 1 लाख करोड़ रुपये का प्रभाव पड़ेगा, जिसे घरेलू विकास को संतुलित रखने के उद्देश्य से किया गया है।
सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के संदर्भ में वित्त मंत्री ने गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को निर्देशित किया कि वे इन उद्यमों के भुगतान में 45 दिनों की निर्धारित समय-सीमा का कड़ाई से पालन करें। उन्होंने बताया कि एमएसएमई के 8.1 लाख करोड़ रुपये के भुगतान फंसे होने से उनकी कार्यशील पूंजी और समग्र विकास प्रभावित हो रहा है। उन्होंने सरकारी उपक्रमों से आग्रह किया कि वे इस विलंब को समाप्त कर आर्थिक चक्र को गति प्रदान करें।




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