सागर, 25 मई।
रीवा जिले में हुई एक सड़क दुर्घटना में दो जैन आर्यिकाओं के आकस्मिक निधन के उपरांत जैन समाज में गहरा शोक और रोष व्याप्त है। इस घटना के विरोध में सोमवार को सागर में समाज के नेतृत्व में एक विशाल मौन जुलूस निकाला गया। मौन जुलूस के माध्यम से समाज ने संत-साध्वियों की सुरक्षा के लिए प्रशासन से ठोस और प्रभावी नीति बनाने की मांग की है।
सोमवार सुबह कटरा नमक मंडी स्थित एक ऐतिहासिक मंदिर परिसर से समाज के सैकड़ों लोग एकत्रित हुए। हाथों में तख्तियां लिए पुरुष, महिलाएं और युवाओं ने बिना किसी नारेबाजी के शांतिपूर्ण तरीके से मौन जुलूस निकाला। यह जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ एक स्थानीय पुलिस थाने तक पहुँचा।
जैन समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने राज्य के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन थाना प्रभारी को सौंपा। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जैन संत और आर्यिकाएं आजीवन पैदल विहार करते हैं, ऐसे में उनके सुरक्षित आवागमन हेतु प्रशासन को विशेष जिम्मेदारी निभानी चाहिए। प्रतिनिधियों ने रीवा की घटना को तेज रफ्तार और लापरवाह वाहन चालकों की लापरवाही का परिणाम बताया और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में मुख्य रूप से यह मांग उठाई गई है कि संतों के विहार के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों और मुख्य मार्गों पर पुलिस पेट्रोलिंग तथा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं, ताकि भविष्य में इस प्रकार की हृदयविदारक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। समाज ने चेतावनी दी है कि यदि संतों की सुरक्षा के लिए शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो समाज को व्यापक आंदोलन के लिए विवश होना पड़ेगा।
इस मौन जुलूस में दिगंबर जैन समुदाय की विभिन्न इकाइयों सहित बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए और दिवंगत आर्यिकाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की।







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