संपादकीय
25 May, 2026

त्विषा शर्मा मामले में सुप्रीम सुनवाई: न्याय की अंतिम आस बनी याचिका

त्विषा शर्मा मामले में सुप्रीम कोर्ट की स्वतः संज्ञान सुनवाई और सीबीआई जांच के बीच संस्थागत पक्षपात, जांच प्रक्रिया और साक्ष्य सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठते हुए न्याय की उम्मीदें सर्वोच्च न्यायालय पर केंद्रित हैं।

भोपाल, 25 मई।

भोपाल की पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की बहू त्विषा शर्मा की संदिग्ध मृत्यु अब केवल एक पारिवारिक त्रासदी तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे न्यायिक और प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर प्रश्नचिह्न के रूप में सामने आई है। 12 मई को हुई इस घटना के बाद परिजन पिछले 14 दिनों से लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं।

परिजनों की ओर से एम्स दिल्ली के मेडिकल बोर्ड से पुनः पोस्टमार्टम कराने, पति समर्थ सिंह की निष्पक्ष जांच और मामले की सीबीआई जांच की मांग की गई थी। अब इस प्रकरण में सीबीआई जांच प्रारंभ हो चुकी है और सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे “वैवाहिक घर में युवती की अस्वाभाविक मृत्यु में संस्थागत पक्षपात और प्रक्रियागत विसंगतियां” शीर्षक के तहत दर्ज किया है। यह मामला चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आ सकता है, जिससे न्यायपालिका की चिंता स्पष्ट झलकती है।

घटना 12 मई की बताई जा रही है, जबकि मामला 14 मई को दर्ज हुआ। इस दौरान आरोपी पति समर्थ सिंह 22 मई तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा। 15 मई को सास गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत मिल गई, वहीं 18 मई को समर्थ की जमानत पर सुनवाई थी, पर गिरफ्तारी नहीं हो सकी। बाद में कोर्ट से राहत न मिलने पर उसके खिलाफ इनाम घोषित किया गया। परिजन सवाल उठा रहे हैं कि आरोपी इतने दिनों तक पुलिस से कैसे बचता रहा और क्या उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि ने जांच की दिशा प्रभावित की।

परिजनों का आरोप है कि पुलिस और कानूनी प्रक्रिया में आरोपी पक्ष को अतिरिक्त संरक्षण मिला। हाई कोर्ट परिसर में समर्थ को कुछ वकीलों के चैंबर में देखे जाने की बात भी सामने आई है, जिससे समान न्याय को लेकर सवाल उठे हैं। इसी कारण इस पूरे मामले को संस्थागत पक्षपात से जोड़कर देखा जा रहा है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर भी गंभीर संदेह व्यक्त किए गए हैं। आरोप है कि प्रारंभिक पोस्टमार्टम में महत्वपूर्ण चोटों की समुचित जांच नहीं की गई, जिसके बाद हाई कोर्ट के आदेश पर एम्स दिल्ली के चार वरिष्ठ चिकित्सकों के बोर्ड ने पुनः परीक्षण किया। इससे राजधानी की चिकित्सा व्यवस्था पर भरोसे को लेकर भी प्रश्न खड़े हुए हैं।

मामले में साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका भी जताई जा रही है। परिजनों ने घर को सील करने और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की है। 12 से 20 मई तक की कॉल डिटेल और पोस्टमार्टम के समय के फुटेज की जांच को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिस पर आगे सुनवाई होनी है।

भोपाल न्यायालय ने समर्थ सिंह को सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है। पुलिस का कहना है कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। ऐसे में अब पूरा मामला सीबीआई जांच और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी पर केंद्रित हो गया है। यदि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ती है और दोषी पाए जाने वालों की जवाबदेही तय होती है, तो यह न्यायिक व्यवस्था पर भरोसे को मजबूत करेगा, अन्यथा यह मामला भी अनसुलझी फाइलों में शामिल हो सकता है।

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