दिल्ली, 25 मई ।
ट्विशा शर्मा मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सोमवार को सुनवाई की और दोनों पक्षों को मीडिया में बयानबाजी से बचने की नसीहत दी। शीर्ष अदालत ने कहा कि मामले को कानून के अनुसार आगे बढ़ने दिया जाए और मीडिया पीड़ित या दूसरे पक्ष के बयानों के पीछे न भागे। सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने न्यायपालिका की निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों पर चिंता भी जताई।
दरअसल, 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में ट्विशा शर्मा फंदे पर लटकी मिली थीं। ससुराल पक्ष इसे आत्महत्या बता रहा है, जबकि मायके पक्ष ने पति और ससुराल वालों पर हत्या के आरोप लगाए हैं। मामले से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की है।
सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि कुछ रिपोर्टों में न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए गए। इसमें यह उल्लेख किया गया कि ट्विशा के पति पेशे से वकील हैं और उनकी मां पूर्व जिला न्यायाधीश रह चुकी हैं। इसी आधार पर जांच को प्रभावित करने और निष्पक्षता को लेकर आशंकाएं जताई गई थीं, जिसके बाद अदालत ने मामले पर स्वत: कार्रवाई शुरू की।
इधर, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आरोपी सास और पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस राज्य सरकार और ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा की उस याचिका पर जारी हुआ, जिसमें ट्रायल कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत का विरोध किया गया है। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कहा गया कि गिरिबाला सिंह जांच में सहयोग नहीं कर रहीं। अदालत ने दो दिन में जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 27 मई तय की है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए तुषार मेहता ने भी आरोप लगाया कि गिरिबाला सिंह जांच प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न कर रही हैं। वहीं भोपाल जिला अदालत में मामले की सुनवाई मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई है। पुलिस प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं होने के कारण अदालत ने पुलिस को मंगलवार तक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
इस बीच मामले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने अपने हाथ में ले ली है। एजेंसी की टीम सोमवार को दिल्ली से भोपाल पहुंची और स्थानीय पुलिस से मामले का रिकॉर्ड व जांच संबंधी जानकारी अपने कब्जे में ली।








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